वाराणसी : विकास की आड़ में काशी की धार्मिक धरोहरों को नुकसान का आरोप, कांग्रेस ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के नाम पर धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों से कथित छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को कांग्रेस महानगर इकाई के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर देवी-देवताओं की मूर्तियों और प्राचीन धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाए जाने के मामलों की जांच की मांग की।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि विकास कार्यों के दौरान काशी की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे आमजनता की धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात लगा है। इस दौरान कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वाराणसी में विकास के नाम पर चारों ओर विनाश का वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे पहले श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान सैकड़ों प्राचीन मंदिरों को ध्वस्त किया गया, जिससे काशी की सदियों पुरानी धार्मिक विरासत को क्षति पहुंची।

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर सर्वसेवा संघ आश्रम को उजाड़ा गया, जो न केवल सामाजिक बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन की भी अहम विरासत रहा है। अब पूर्वांचल की सबसे पुरानी और प्रमुख दालमंडी को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे लगभग दस हजार लोगों की रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि बिना समुचित पुनर्वास और संवाद के यह कार्रवाई की जा रही है।

राघवेंद्र चौबे ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में मां अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित कई धार्मिक स्थलों, मंदिरों और देवी-देवताओं की मूर्तियों को बिना किसी संरक्षण व्यवस्था के हटाया गया है। उन्होंने दावा किया कि मां अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त किया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यह सूचनाएं सामने आई हैं कि प्राचीन तारकेश्वर महादेव मंदिर को भी नुकसान पहुंचाया गया है।

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्थलों का निरीक्षण कराया जाए, जिसमें जिला प्रशासन, स्थानीय नागरिकों और कांग्रेस प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि स्थिति की वास्तविकता सामने आ सके।          

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस कार्यकर्ता पहले क्रमिक अनशन और उसके बाद आमरण अनशन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन काशी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की रक्षा के लिए किया जाएगा।

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