वाराणसी : देव स्वरूपों की झांकी ने मोहा मन, खोजवां बाजार में गूंजे भक्ति के जयकारे
वाराणसी। सरायनंदन स्थित श्री कोल्हुआ बीर व्यायामशाला और खोजवां बाजार की ओर से वर्षों से चली आ रही पारंपरिक झांकी का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। झांकी में स्थानीय कलाकारों और व्यायामशाला के सदस्यों ने देवी-देवताओं के विभिन्न स्वरूपों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। आकर्षक सजावट और कलाकारों की प्रस्तुति देखने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग और श्रद्धालु पहुंचे। झांकी के दौरान खोजवां बाजार और सरायनंदन का पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।
झांकी में भगवान शिव, भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी, मां दुर्गा समेत विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूप शामिल रहे। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और आकर्षक श्रृंगार में नजर आए। झांकियों की सजावट और कलाकारों की प्रस्तुति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। पारंपरिक संगीत और भक्ति गीतों के बीच झांकी आगे बढ़ती रही। श्रद्धालु रास्ते में रुककर विभिन्न स्वरूपों के दर्शन करते रहे।

रोशनी से जगमगाया खोजवां बाजार
आयोजन को लेकर खोजवां बाजार और आसपास की गलियों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जगह-जगह विद्युत सजावट की गई थी। शाम होते ही रोशनी से पूरा क्षेत्र जगमगा उठा। झांकी देखने के लिए बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भीड़ जुटने लगी। कई परिवार एक साथ आयोजन में पहुंचे और झांकी का आनंद लिया। देवी-देवताओं के स्वरूपों के दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। झांकी के साथ चल रहे लोगों के बीच धार्मिक जयकारे गूंजते रहे। आयोजन के चलते क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
सामूहिक सहयोग से कायम है परंपरा
श्री कोल्हुआ बीर व्यायामशाला की यह झांकी क्षेत्र की वर्षों पुरानी धार्मिक और लोक परंपरा का हिस्सा है। स्थानीय लोगों के सहयोग से हर वर्ष इसका आयोजन किया जाता है। झांकी की तैयारी, कलाकारों के चयन, सजावट और आयोजन की व्यवस्था में क्षेत्र के लोग अपनी भूमिका निभाते हैं। आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों की सामूहिक भागीदारी भी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि ऐसी पारंपरिक झांकियां धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी बनती हैं। आयोजन में क्षेत्र के लोग एक साथ जुटते हैं और उत्सव को सफल बनाने में सहयोग करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आधुनिक दौर में भी इस पुरानी परंपरा का जारी रहना काशी की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे नई पीढ़ी को धार्मिक परंपराओं और लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। झांकी ने एक बार फिर खोजवां बाजार और सरायनंदन में काशी की पारंपरिक संस्कृति, आस्था और सामूहिक उत्सव की झलक पेश की।

