वाराणसी : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम में मधुमक्खियों का हमला, कई लोग घायल, मची अफरातफरी
वाराणसी। जगतपुर में मंगलवार को आयोजित ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के कार्यक्रम में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। मधुमक्खियों के हमले में कई श्रद्धालुओं और कार्यक्रम में मौजूद लोगों को काट लिया। स्थिति बिगड़ने पर शंकराचार्य जी को भी सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम बीच में छोड़कर रवाना होना पड़ा।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज इन दिनों गौ रक्षा संकल्प के तहत 81 दिवसीय “गविष्ठी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा” पर हैं। यह यात्रा गोरखपुर से शुरू हुई है और प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं से होकर गुजर रही है। यात्रा का उद्देश्य गौमाता की रक्षा, गौवंश संरक्षण और गौमाता को राष्ट्रमाता एवं राज्यमाता घोषित कराने की मांग को जन-जन तक पहुंचाना बताया जा रहा है।
इसी क्रम में मंगलवार को यात्रा के काशी पहुंचने पर जगतपुर क्षेत्र में भव्य स्वागत और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में गौभक्त, साधु-संत और स्थानीय लोग मौजूद थे। शंकराचार्य जी के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्यक्रम चल ही रहा था कि अचानक मधुमक्खियों का झुंड कार्यक्रम स्थल के ऊपर मंडराने लगा और लोगों पर हमला कर दिया। देखते ही देखते वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई श्रद्धालुओं ने कपड़ों और गमछों से खुद को ढंककर मधुमक्खियों से बचने का प्रयास किया।
मधुमक्खियों के हमले में कई लोगों को चेहरे, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में डंक लगे। कुछ श्रद्धालुओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
मधुमक्खियों के लगातार हमले और बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए कार्यक्रम को तत्काल रोकना पड़ा। सुरक्षा कारणों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को भी कार्यक्रम बीच में छोड़कर वहां से रवाना होना पड़ा। घटना के बाद कुछ समय तक कार्यक्रम स्थल पर दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल के आसपास पेड़ों पर मधुमक्खियों के बड़े छत्ते मौजूद थे। संभावना जताई जा रही है कि तेज ध्वनि, भीड़भाड़ या अन्य हलचल के कारण मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं।

