वाराणसी : निवेश के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी, आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

123
WhatsApp Channel Join Now

तीन मुकदमों का आपराधिक इतिहास छिपाने को अदालत ने माना गंभीर, निवेशकों से रकम लेकर धमकी देने का है आरोप

वाराणसी। निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने और रकम वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी देने के आरोपित कुशाग्र श्रीवास्तव को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार की अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज तीन मुकदमों और अग्रिम जमानत अर्जी में आपराधिक इतिहास का उल्लेख नहीं किए जाने को महत्वपूर्ण आधार माना।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, भेलूपुर क्षेत्र की निवासी नीलिमा सिंह ने आरोप लगाया था कि कुशाग्र श्रीवास्तव, उसकी पत्नी शुभांगी श्रीवास्तव और अन्य लोगों ने गुड लाइफ फाइनेंशियल हब तथा गुड लाइफ एचडीएफसी हब के नाम पर निवेश कराने का झांसा दिया था। आरोप है कि निवेश पर अच्छा रिटर्न देने का भरोसा दिलाकर उनसे चार लाख रुपये लिए गए। शुरुआत में कुछ समय तक निवेश की रकम पर ब्याज दिया गया, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया।

रकम मांगने पर धमकी देने का आरोप
नीलिमा सिंह का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। प्रकरण में 13 अगस्त 2026 को कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मुकदमे में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए आरोपी की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई थी।

अभियोजन ने किया जमानत का विरोध
एडीजीसी संतोष तिवारी के अनुसार, आरोपी ने अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि वादिनी को ब्याज सहित 1.23 लाख रुपये वापस किए जा चुके हैं और अब कोई रकम बकाया नहीं है। आरोपी की ओर से मुकदमे को साजिश बताते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की गई।

वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए आरोपी के खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमों की जानकारी अदालत के सामने रखी। पत्रावली और उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने पर अदालत को पता चला कि कैंट थाने में दर्ज मौजूदा मुकदमे के अतिरिक्त लालपुर-पांडेयपुर थाने में भी आरोपी के खिलाफ दो अन्य प्राथमिकी दर्ज हैं।

आपराधिक इतिहास छिपाने पर अदालत सख्त
इस तरह आरोपी के खिलाफ कुल तीन मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई। अदालत ने अग्रिम जमानत अर्जी में आपराधिक इतिहास का उल्लेख नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया। मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के बाद कुशाग्र श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।

Share this story