वाराणसी : शंखनाद, डमरुओं के निनाद और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने ज्ञानवापी स्थित माता श्रृंगार गौरी का किया दर्शन, अर्पित की श्रृंगार सामग्री, प्रशासन अलर्ट

वाराणसी। नवरात्र के चौथे दिन ज्ञानवापी परिसर स्थित ज्ञानवापी केस की वादिनी महिलाओं व हिंदू पक्ष के पैरोकार समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी का दर्शन किया। इस दौरान मां की विधिविधान से आराधना की। वहीं श्रृंगार सामग्री अर्पित कर आशीर्वाद मांगा। साल में एक बार ही मां के दर्शन का मौका मिलता है।
ज्ञानवापी केस को लेकर वाद दायर करने वाली पाँच महिलाओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 8:30 बजे सत्यनारायण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4-बी से भक्तों को प्रवेश दिया गया। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की एंट्री दोपहर तक जारी रही। सुबह ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के बैनर तले श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था गंगा जल लेकर मंदिर की ओर निकला। रास्तेभर श्रद्धालु भक्ति गानों पर झूमते रहे और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। शंखनाद, डमरू वादन और मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
करीब 25 मिनट तक चली विधिवत पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां श्रृंगार गौरी की प्राचीन प्रतिमा के टूटे हुए पत्थरों पर सिंदूर और चंदन का लेपन किया। पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ मां की आराधना की गई। भक्तों ने मां श्रृंगार गौरी से परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में शांति की कामना की।
ज्ञानवापी परिसर में स्थित यह देवी विग्रह अत्यंत पूजनीय मानी जाती हैं। मान्यता है कि मां श्रृंगार गौरी की आराधना करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर वाराणसी में श्रद्धा और आस्था की अनूठी छटा देखने को मिली। भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे, ताकि श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें।
चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में काशी की परंपरा के अनुसार मां श्रृंगार गौरी की विशेष आराधना संपन्न हुई। इस पावन दिन पर काशीवासियों और श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से मां श्रृंगार गौरी की पूजा-अर्चना की। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं के लिए नारियल और फलाहारी प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई।
सुंदरकांड व हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन
नवरात्रि पर्व के अंतर्गत श्री काशी विश्वनाथ धाम न्यास द्वारा सुबह सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा पाठ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं और काशीवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
ललिता सहस्रनाम पाठ से गूंजा धाम
सायंकाल में 51 मातृशक्ति स्वरूपा माताओं द्वारा ललिता सहस्रनाम पाठ का आयोजन किया गया। मां ललिता, जिन्हें माता त्रिपुरसुंदरी के नाम से भी जाना जाता है, शाक्त मत एवं तंत्र साधना की सर्वोच्च शक्ति मानी जाती हैं। काशी के भैरव द्वार के पास स्थित मां ललिता तीर्थ पर इस अनुष्ठान का विशेष आयोजन किया गया, जहां काशी की नौ गौरी में से एक मां लालिता गौरी विराजमान हैं।