वाराणसी : अक्षरम में बिखरे काव्य के रंग, 150 विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मधुबन पार्क में शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की बीएचयू इकाई की ओर से ‘अक्षरम्-काव्य प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों से करीब 150 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर अपनी काव्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रबोध और समसामयिक विषयों को अपनी रचनाओं के माध्यम से स्वर दिया।

123

आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में साहित्य और काव्य के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी सृजनात्मक चेतना को अभिव्यक्ति का मंच देना रहा। प्रतिभागियों ने अपनी मौलिक रचनाओं का सस्वर काव्य-पाठ कर युवा मन की संवेदनाओं और कल्पनाशीलता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। किसी रचना में सामाजिक समस्याओं की पीड़ा उभरी तो किसी में राष्ट्र और संस्कृति के प्रति अनुराग दिखाई दिया। भावपूर्ण प्रस्तुति और प्रभावशाली काव्य-पाठ ने आयोजन को जीवंत बना दिया।

123

प्रतियोगिता में प्रस्तुत रचनाओं का निर्णायक मंडल ने विभिन्न मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया। रचनात्मकता, विषय-वस्तु, भाषा-शैली, भावाभिव्यक्ति और प्रस्तुति-कौशल को आधार बनाकर श्रेष्ठ प्रस्तुतियों का चयन किया गया। चयनित युवा कवियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों की काव्य प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कविता महज भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज की चेतना, संवेदना और सांस्कृतिक स्मृति को स्वर देने वाली सशक्त विधा है। उन्होंने विद्यार्थियों से साहित्य का अध्ययन करते हुए अपनी सृजनात्मक प्रतिभा को निरंतर निखारने का आह्वान किया।

123

अभाविप बीएचयू इकाई की छात्रा कार्यकर्ता मेघा मुखर्जी ने अपने संबोधन में देश की वीरांगनाओं और जौहर की परंपरा का उल्लेख करते हुए इसे साहस और अस्मिता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने अपने साहस और स्वाभिमान की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने जेएनयू में कथित रूप से उठने वाले ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारों का विरोध करते हुए कहा कि अभाविप राष्ट्रीय गरिमा के मुद्दे पर हमेशा मुखर रहा है। इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में छिपे रचनाकार को मंच देने के साथ उनकी साहित्यिक प्रतिभा को निखारने का अवसर देती हैं। इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन ने ‘शब्दों से सृष्टि, भावों से भारती, काव्य से संस्कृति’ के भाव को सार्थक किया।

123

Share this story