4 नए जीआई उत्पादों के साथ यूपी बना देश का नंबर-1 राज्य, कुल जीआई उत्पादों संख्या पहुंची 83
काशी का 'जीआई मॉडल' दुनिया में अव्वल ,अकेले वाराणसी क्षेत्र के पास सर्वाधिक 32 जीआई टैग
मथुरा वृंदावन कंठी माला, अलीगढ़ धातु मूर्ति, अलीगढ़ हार्डवेयर दस्तगी हस्तगी के साथ भोजपुर पीढियां पेंटिंग को मिला जीआई का दर्जा
ओडीओपी के बाद 'एक जनपद, एक व्यंजन' को भी जीआई प्रक्रिया में शामिल करने पर तेजी से चल रहा काम
वाराणसी। उत्तर प्रदेश ने वैश्विक मंच पर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत का परचम लहराते हुए इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व के चलते उत्तर प्रदेश 83 जीआई उत्पादों के साथ देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। दम तोड़ती प्राचीन कलाओं को .गी सरकार में न केवल नया जीवन मिला है, बल्कि 'लोकल से ग्लोबल' के संकल्प को भी नई उड़ान मिली है।
हाल ही में चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री द्वारा जारी नवीनतम सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 4 नए उत्पादों को यह प्रतिष्ठित टैग हासिल हुआ है।'जीआई मैन ऑफ इंडिया' के रूप में विख्यात और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रजनी कांत ने बताया कि नए पंजीकरणों के बाद उत्तर प्रदेश ने भारत में प्रथम स्थान बरकरार रखते हुए अपनी पकड़ और मजबूत कर लिया है।

4 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग
मथुरा-वृंदावन की कंठी माला (विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक)
अलीगढ़ की धातु मूर्ति (मेटल क्राफ्ट)
अलीगढ़ हार्डवेयर (दस्तगी-हस्तगी)
भोजपुर की पीढ़ियां पेंटिंग

काशी का 'जीआई मॉडल' दुनिया में अव्वल
उत्तर प्रदेश की इस ऐतिहासिक सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का सबसे बड़ा योगदान है। 'काशी का जीआई मॉडल' हस्तकला के वैश्विक मानचित्र पर उभरा है। अकेले वाराणसी क्षेत्र के पास सर्वाधिक 32 जीआई टैग हैं, जो किसी भी एक भौगोलिक क्षेत्र के लिए एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड है।

डॉ. रजनी कांत ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी रिकॉर्ड जीआई पंजीकरण हुए हैं। इस वर्ष लद्दाख (8), झारखंड (8), मध्य प्रदेश (22) सहित बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और असम को मिलाकर कुल 84 नए जीआई पंजीकृत किए गए हैं। इसके अलावा एक ही वर्ष में 215 नए आवेदन प्रस्तुत कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है।

1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी में जीआई का बड़ा योगदान
पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने विश्वास जताया कि कि जीआई टैग मिलने से न केवल उत्पादों की नकल रुकेगी, बल्कि इससे जुड़े लाखों शिल्पकारों, बुनकरों, महिलाओं, किसानों, कारीगरों और उद्यमियों के जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में यह जीआई मॉडल एक मजबूत स्तंभ साबित होगा।

'एक जनपद, एक व्यंजन' की ओर बढ़ते कदम
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उत्तर प्रदेश सरकार अब 'एक जनपद, एक उत्पाद' (ODOP) के बाद 'एक जनपद, एक व्यंजन' को भी जीआई प्रक्रिया में शामिल करने पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य राज्य के पारंपरिक लजीज व्यंजनों को भी कानूनी संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।







