वाराणसी में मूसलाधार बारिश, बीएचयू परिसर में भरा पानी, मरीजों व तीमारदारों के लिए बढ़ी परेशानी 

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वाराणसी। मानसून की मूसलाधार बारिश ने सोमवार की रात काशी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। रात करीब नौ बजे शुरू हुई तेज बारिश ने कुछ ही देर में शहर के प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों को जलमग्न कर दिया। रात नौ से 10 बजे के बीच करीब 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। तेज बारिश के साथ बिजली की चमक और बादलों की गर्जना ने लोगों को सहमा दिया। महज 20 मिनट की तेज बारिश में कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। देर रात तक बारिश का दौर रुक-रुककर जारी रहा और मंगलवार की भोर तक झमाझम बारिश होती रही।

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सबसे खराब स्थिति काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सिंह द्वार पर रही। यहां सड़क पर घुटने तक पानी भर गया। जलभराव के कारण पैदल राहगीरों के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी उठानी पड़ी। कई दोपहिया वाहन पानी में फंसकर बंद हो गए। एक वाहन बंद होने के बाद लोग उसे धक्का देकर जलभराव वाले हिस्से से बाहर निकालते नजर आए।

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अस्पताल जाने वाले मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
बीएचयू सिंह द्वार पर जलभराव का सबसे अधिक असर सर सुंदरलाल अस्पताल जाने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों पर पड़ा। अस्पताल पहुंचने के लिए लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी जलभराव के कारण परेशान हुए। मरीजों को लेकर आने वाले परिजनों ने कहा कि सड़क पर पानी जमा होने से अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

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स्थानीय लोगों के अनुसार सिंह द्वार और आसपास के इलाके में भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या हर साल सामने आती है। उनका कहना है कि बारिश का पानी तेजी से निकालने के लिए जलनिकासी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। पानी देर तक जमा रहने से यातायात प्रभावित होने के साथ राहगीरों को भी परेशानी होती है।

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कैंट से मंडुवाडीह तक जलभराव
मूसलाधार बारिश का असर शहर के कई हिस्सों में देखने को मिला। कैंट, सुंदरपुर, लहरतारा, मंडुवाडीह, चांदपुर और रथयात्रा समेत कई इलाकों में सड़कें पानी से भर गईं। कई स्थानों पर वाहन चालकों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। निचले इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को घरों और दुकानों से निकलने में भी दिक्कत हुई। बारिश के चलते कई मार्गों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई। रोहनिया और ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी इलाकों की तुलना में जलभराव अपेक्षाकृत कम रहा। हालांकि बारिश के कारण वहां भी जनजीवन प्रभावित हुआ।

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