काशी में शिवत्व की नई छाप, शिवलिंग और मंदिर की थीम पर बनेंगे तीन नए भवन
रिपोर्ट -ओमकार नाथ
वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी अब अपनी आधुनिक विकास परियोजनाओं में भी शिवत्व की छाप छोड़ रही है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में विकास कार्यों को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसी क्रम में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के बाद अब अगले वर्ष तक शिवलिंग और मंदिर की थीम पर आधारित तीन और भव्य भवन तैयार किए जाएंगे। इनमें भेलूपुर जलकल परिसर का शिवलिंग थीम पार्क, कमिश्नरी परिसर का एकीकृत मंडलीय कार्यालय और नगर निगम का नया सदन भवन प्रमुख हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि काशी की आध्यात्मिक पहचान को वास्तुकला के माध्यम से दुनिया के सामने प्रस्तुत करना भी है। शहर में होने वाले नए निर्माणों में बाबा विश्वनाथ मंदिर, शिवलिंग, त्रिशूल, डमरू और बेलपत्र जैसी धार्मिक प्रतीकात्मकताओं को प्रमुखता दी जा रही है।

शिवलिंग की आकृति में बनेगा नगर निगम का नया सदन भवन
नगर निगम का नया सदन भवन करीब 22 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में बनाया जाएगा। लगभग 97 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन सात मंजिला होगा। इसकी वास्तुकला गंगा और काशी की सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखकर तैयार की जा रही है।
भवन का मुख्य स्वरूप शिवलिंग की आकृति पर आधारित होगा, जिससे यहां आने वाले लोगों को काशी की धार्मिक पहचान का अनुभव हो सके। इस भवन में नगर निगम के सभी विभागों को एक ही परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अलावा आधुनिक सुविधाओं से युक्त 300 लोगों की क्षमता वाला सदन सभागार भी बनाया जाएगा, जहां निगम की बैठकें और अन्य प्रशासनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भेलूपुर जलकल परिसर में विकसित होगा शिवलिंग थीम पार्क
भेलूपुर स्थित जलकल परिसर को भी नई पहचान देने की तैयारी है। यहां शिवलिंग थीम पार्क विकसित किया जाएगा, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक वातावरण का समावेश होगा।
पार्क में आकर्षक लैंडस्केपिंग, हरियाली, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और धार्मिक थीम पर आधारित कलात्मक संरचनाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों और पर्यटकों को एक ऐसा स्थल उपलब्ध कराना है जहां आधुनिक सुविधाओं के बीच काशी की आध्यात्मिक विरासत का अनुभव हो सके।
मंदिर और शिवलिंग थीम पर बनेगा एकीकृत मंडलीय कार्यालय
कमिश्नरी परिसर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से 12 मंजिला एकीकृत मंडलीय कार्यालय बनाया जा रहा है। इस परियोजना की देखरेख वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) कर रहा है और निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
इस भवन में वर्तमान में शहर के अलग-अलग स्थानों पर संचालित 62 विभागों को एक ही परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। भवन का डिजाइन भी मंदिर और शिवलिंग की थीम पर आधारित होगा, जिससे प्रशासनिक भवन भी काशी की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन सके।
गंजारी स्टेडियम और रोपवे में भी दिखेगी शिव की छाप
काशी में बन रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के गंजारी स्टेडियम में भी धार्मिक प्रतीकों को महत्व दिया गया है। स्टेडियम में त्रिशूल के आकार की फ्लड लाइटें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा परिसर के विभिन्न हिस्सों में शिवलिंग और बेलपत्र की झलक दिखाई देगी।
वहीं शहर में निर्माणाधीन रोपवे परियोजना को भी बाबा विश्वनाथ मंदिर की स्थापत्य शैली और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को काशी की धार्मिक विरासत का अनुभव हो सके।
62 चौराहों पर भी होगी शिव थीम की झलक
शहर के 62 प्रमुख चौराहों के सौंदर्यीकरण का कार्य भी धार्मिक थीम पर किया जा रहा है। यहां लगाए जाने वाले स्कल्पचर बाबा विश्वनाथ, शिवलिंग और भगवान शिव के वाहन नंदी की अवधारणा पर आधारित होंगे।
इसके साथ ही चौराहों पर लैंडस्केपिंग, हरियाली, आकर्षक रात्रि प्रकाश व्यवस्था और अन्य सौंदर्यीकरण कार्यों में भी मंदिर वास्तुकला को प्रमुखता दी जा रही है, ताकि शहर का हर प्रमुख प्रवेश और सार्वजनिक स्थल काशी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित कर सके।
आध्यात्म और आधुनिकता का अनूठा संगम
काशी में चल रही इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रशासन शहर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ-साथ उसकी सनातन सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित और प्रदर्शित करने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में काशी की नई इमारतें केवल प्रशासनिक या सार्वजनिक उपयोग की संरचनाएं नहीं होंगी, बल्कि वे बाबा विश्वनाथ की नगरी की आध्यात्मिक पहचान और स्थापत्य कला का जीवंत प्रतीक भी बनेंगी।

