वाराणसी को नशामुक्त बनाने को निकली जनजागरुकता यात्रा, हजारों ने सड़क पर उतरकर किया जागरूक, सामाजिक बदलाव को उठी आवाज
वाराणसी। नशामुक्ति के समर्थन में वाराणसी में एक बड़ा जनजागरण अभियान देखने को मिला। भगवती मानव कल्याण संगठन के तत्वावधान में “नशामुक्त भारत, खुशहाल काशी” के संकल्प के साथ काशी हिंदू विश्वविद्यालय मैदान से विशाल पदयात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं, युवा, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश दिया।

पदयात्रा के दौरान पूरे मार्ग में नशा मुक्ति के नारों से वातावरण गूंजता रहा। प्रतिभागियों ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया। आयोजन का उद्देश्य काशी को नशामुक्त घोषित कराने के साथ-साथ परिवारों को खुशहाल और समाज को अपराधमुक्त बनाना बताया गया।

यह कार्यक्रम संगठन के संस्थापक संचालक योगीराज शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन और आशीर्वाद में आयोजित किया गया। इस दौरान केंद्रीय अध्यक्ष आरुणी जी, शक्ति स्वरूप बहन पूजा शुक्ला, केंद्रीय महासचिव अजय अवस्थी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए पूजा शुक्ला ने कहा कि काशी संतों और भक्तों की पावन भूमि है, लेकिन यहां बढ़ता नशा चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहर में शराब के ठेकों की बढ़ती संख्या के कारण युवा वर्ग तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रहा है, जिससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अपील की कि वे आगे आकर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाएं, क्योंकि नशे के कारण घरेलू हिंसा और सामाजिक विघटन की घटनाएं बढ़ रही हैं।

केंद्रीय महासचिव अजय अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान शिव पवित्रता के प्रतीक हैं और उनके नाम पर नशे का सेवन करना धार्मिक आस्था की गलत व्याख्या है। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध वर्ग से इस बुराई के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सरकार पर भी आरोप लगाया कि राजस्व बढ़ाने के लिए शराब के ठेकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवा वर्ग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं। पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर संत-महात्माओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रशासन के सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अंत में सभी ने काशी को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया और इस अभियान को निरंतर जारी रखने की बात कही।


