सावन का तीसरा सोमवार : सारंगनाथ मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, सावन में साले के साथ विराजमान रहते हैं बाबा विश्वनाथ, जानिये पौराणिक महात्म्य
वाराणसी। सावन के तीसरे सोमवार को सारंगनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान सारंगनाथ का दर्शन कर जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि की कामना की।

भक्तों ने गंगाजल, बेलपत्र, फूल और पूजा सामग्री के साथ मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में कांवड़िये भी दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान को जल और बेलपत्र अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सारंगनाथ के दर्शन और पूजन का सावन में विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन के पूरे महीने भगवान विश्वनाथ अपने साले भगवान सारंगनाथ के साथ विराजमान रहते हैं। इसी आस्था के चलते सावन के सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से भगवान सारंगनाथ की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

तीसरे सोमवार को सुबह से ही मंदिर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। कतार में लगे भक्त भगवान के जयकारे लगाते हुए अपनी बारी का इंतजार करते रहे। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे दिन मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में डूबा रहा।


