APK फाइल भेजकर ले लेते थे मोबाइल का रिमोट एक्सेस, खाते से उड़ा देते थे पैसा, 53 लाख की ऑनलाइन ठगी करने वाले 5 गिरफ्तार
वाराणसी। प्रदेश व्यापी 'साइबर वज्र' अभियान के तहत वाराणसी पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस आयुक्तालय की प्रतिबिंब सेल, साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने संगठित साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस सप्ताह साइबर अपराधियों के खिलाफ वाराणसी पुलिस की यह तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार गिरोह अब तक देशभर में 53 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका है।

डीसीपी नीतू ने बताया कि गिरफ्तार पांच आरोपियों में दो सदस्य तकनीकी रूप से बेहद दक्ष हैं और एपीके (APK) फाइल तैयार कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। ये आरोपी मोबाइल फोन पर एपीके लिंक भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति एंड्रॉयड फोन से उस लिंक पर क्लिक करता, उसके मोबाइल का रिमोट एक्सेस साइबर अपराधियों के पास पहुंच जाता था। इसके बाद आरोपी पीड़ित के बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, यूजर आईडी और अन्य गोपनीय जानकारियां हासिल कर खातों से रकम निकाल लेते थे। इस तकनीक का इस्तेमाल कर गिरोह ने कई लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया।
गिरोह के अन्य तीन सदस्य साइबर ठगी से प्राप्त धन को ठिकाने लगाने का काम करते थे। इसके लिए वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन म्यूल अकाउंट्स का उपयोग ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने और उसके स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह पूरी योजना के साथ संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड आदर्श, निवासी मिर्जापुर है। गिरोह के अन्य सदस्य बलिया, मऊ, मुजफ्फरनगर और वाराणसी के रहने वाले हैं। सभी आरोपी आपस में समन्वय बनाकर अलग-अलग भूमिकाएं निभाते थे और साइबर ठगी के नेटवर्क का संचालन करते थे। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अब तक 22 शिकायतें दर्ज हैं। जांच में पता चला है कि गिरोह 53 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी कर चुका है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, पासबुक, बैंक दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
ठगी से अर्जित धन से खरीदी गई एक महिंद्रा थार और एक हुंडई आई-20 कार को भी पुलिस ने चिह्नित किया है। इन वाहनों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि अपराध से अर्जित अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली प्रतिबिंब सेल, साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम को उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 'साइबर वज्र' अभियान के तहत साइबर अपराधियों के विरुद्ध सघन अभियान आगे भी जारी रहेगा और आम लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले अपराधियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

