साल में सिर्फ एक दिन होते हैं महेश्वर महादेव के दर्शन, जानिये काशी के रहस्यमयी शिवालय की अनोखी परंपरा
महाशिवरात्रि पर ही मिलता है दुर्लभ दर्शन का अवसर, जमीन से 30 फीट नीचे विराजमान हैं महेश्वर महादेव
काशी के चौक क्षेत्र की शीतला गली में स्थित है महेश्वर महादेव मंदिर, आम श्रद्धालुओं के लिए साल में केवल एक दिन, महाशिवरात्रि पर खुलते हैं कपाट
जमीन से करीब 30 फीट नीचे स्थापित है प्राचीन शिवलिंग, शिवलिंग के ऊपर विराजमान है पंचमुखी शेषनाग का दिव्य छत्र
वर्षभर श्रद्धालु करते हैं ऊपर बने छिद्र से ही दर्शन और जलाभिषेक, सामान्य दिनों में सुरक्षा कारणों से बंद रहता है गर्भगृह तक जाने वाला मार्ग
धार्मिक मान्यता के अनुसार काशी विश्वनाथ के पिता के रूप में पूजे जाते हैं महेश्वर महादेव
स्पेशल रिपोर्ट - ओमकार नाथ
वाराणसी। काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, जहां हर गली और मोहल्ले में शिवालयों की भरमार है। सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ समेत विभिन्न शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। लेकिन काशी में एक ऐसा प्राचीन शिवालय भी है, जिसके कपाट पूरे वर्ष बंद रहते हैं और आम श्रद्धालुओं को केवल महाशिवरात्रि के दिन ही मंदिर के भीतर प्रवेश कर दर्शन का अवसर मिलता है। यह अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर है महेश्वर महादेव मंदिर, जिन्हें धार्मिक मान्यताओं में काशी विश्वनाथ के पिता के रूप में माना जाता है।
चौक क्षेत्र की शीतला गली में स्थित यह प्राचीन शिवालय काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग आधा किलोमीटर दूर है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर काशी और गंगा के वर्तमान स्वरूप से भी प्राचीन माना जाता है।

जमीन से 30 फीट नीचे विराजमान हैं महेश्वर महादेव
मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग जमीन के स्तर से लगभग 30 फीट नीचे स्थित है। शिवलिंग के ऊपर बने एक विशेष छिद्र के माध्यम से श्रद्धालु वर्षभर दर्शन और जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर के गर्भगृह तक जाने वाला मार्ग अत्यंत पुराना और जर्जर हो चुका है। सुरक्षा कारणों से इसे सामान्य दिनों में बंद रखा जाता है। यही कारण है कि सावन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर भी श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होती।
महाशिवरात्रि पर खुलते हैं कपाट
महाशिवरात्रि के दिन विशेष व्यवस्थाओं के बीच मंदिर का मार्ग खोला जाता है। इस दौरान महेश्वर महादेव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजन किया जाता है। दुर्लभ दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
देवताओं के आह्वान पर काशी में हुआ महेश्वर महादेव का आगमन
प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवी-देवता काशी पहुंचे तो उन्हें यहां अपने माता-पिता का सानिध्य नहीं मिला। इसके बाद देवताओं ने परमपिता महेश्वर का आह्वान किया। मान्यता है कि देवताओं के आग्रह पर महेश्वर महादेव यहां विराजमान हुए और तभी से यह स्थान विशेष धार्मिक महत्व का केंद्र बन गया। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में महेश्वर महादेव और सिद्धेश्वरी माता के मंदिर को काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।
पंचमुखी शेषनाग का है अद्भुत छत्र
मंदिर की एक और विशेषता यहां स्थापित शिवलिंग के ऊपर विराजमान पंचमुखी शेषनाग का छत्र है। श्रद्धालुओं के अनुसार यह दृश्य मंदिर की दिव्यता और प्राचीनता को और अधिक विशिष्ट बनाता है। काशी खंड में भी इस मंदिर का उल्लेख होने की बात कही जाती है।
सावन में भी बाहर से ही होता है जलाभिषेक
सावन में जहां अन्य शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, वहीं महेश्वर महादेव मंदिर में भक्त बाहर से बने छिद्र के माध्यम से जल अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रद्धा से चढ़ाया गया जल सीधे भगवान शिव तक पहुंचता है और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
काशी की धार्मिक विरासत में महेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं, प्राचीनता और रहस्यमयी स्वरूप के कारण विशेष स्थान रखता है। महाशिवरात्रि पर होने वाले दुर्लभ दर्शन के लिए श्रद्धालु पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं और बाबा के दर्शन को विशेष पुण्यदायक मानते हैं।

