नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप : आज चारों भाइयों का होगा मिलन, 3.36 मिनट के महामिलन को देखने उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब
वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में गुरुवार को नाटी इमली के ऐतिहासिक मैदान में विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप का आयोजन होगा। यहां भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ वनवास से लौटने के बाद भरत और शत्रुघ्न से मिलन का भावपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। चारों भाइयों के महामिलन की यह परंपरा करीब 483 वर्षों से चली आ रही है। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए काशी सहित आसपास के जिलों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
भरत मिलाप का मुख्य आकर्षण वह क्षण होगा, जब चारों भाई एक-दूसरे के गले मिलेंगे। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालु घंटों पहले से मैदान और आसपास की छतों पर जगह घेरने लगते हैं। महामिलन का दृश्य करीब 3 मिनट 36 सेकंड का होता है। इस दौरान पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठता है।
परंपरा के अनुसार काशी नरेश हाथी पर सवार होकर आयोजन स्थल पर पहुंचेंगे। उनके आगमन के साथ ही आयोजन की भव्यता और बढ़ जाएगी। भरत मिलाप की ऐतिहासिक लीला को लेकर आयोजक समिति की ओर से तैयारियां पूरी की जा रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
सदियों पुरानी परंपरा का होगा निर्वहन
नाटी इमली का भरत मिलाप काशी की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। मान्यता है कि इस परंपरा की शुरुआत लगभग 483 वर्ष पहले हुई थी। समय के साथ आयोजन का स्वरूप भले बदला हो, लेकिन चारों भाइयों के मिलन का भाव आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
शाम से उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
आयोजन स्थल नाटी इमली से लेकर आसपास के क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक करीब पांच लाख लोग इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बन सकते हैं। भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी से बचाने पर विशेष जोर रहेगा।
आकाशवाणी से होगा सजीव प्रसारण
भरत मिलाप के ऐतिहासिक महामिलन का आकाशवाणी वाराणसी से भी सजीव प्रसारण किया जाएगा। इससे आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच पाने वाले श्रद्धालु भी इस परंपरा से जुड़ सकेंगे। सजीव प्रसारण के जरिए काशी की इस ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

