काशी में तीन दिन गूंजेगा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का स्वर, देश भर से जुटेंगे 3000 संत, Gen Z Conclave और संस्कृति उत्सव होंगे खास आकर्षण

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संतों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, कलाकारों और युवाओं के बीच भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक पहचान पर होगा मंथन

छह प्रमुख आयामों में आयोजित होंगे कार्यक्रम, नई पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़ने की पहल 

वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में तीन से पांच नवंबर तक भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रीय चेतना का व्यापक विमर्श होगा। इस दौरान आयोजित होने वाली तीन दिवसीय संस्कृति संसद में देशभर से करीब 3000 संत और 7000 से अधिक युवा शामिल होंगे। इसके अलावा देश-विदेश के विद्वान, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, कलाकार और संस्कृति प्रेमी भी हिस्सा लेंगे। आयोजन में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने और वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी।

रविवार को सिगरा स्थित सत कैवल्य ज्ञान पीठ (गुजराती धर्मशाला) में आयोजित पत्रकारवार्ता में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद संतों, विद्वानों, कलाकारों और युवाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है। वर्ष 2014 से प्रत्येक दो वर्ष पर आयोजित हो रही यह संसद अब व्यापक वैचारिक विमर्श का मंच बन चुकी है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूल्यों और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ाना है।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदगुरु अविचल देवाचार्यजी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की समग्र पद्धति है। इसमें परिवार, समाज, प्रकृति और समस्त जीवों के प्रति संवेदनशीलता का भाव निहित है। उन्होंने कहा कि सहअस्तित्व, समरसता और वसुधैव कुटुंबकम की भावना भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान रही है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में सांस्कृतिक पहचान को समझना और उसे युवाओं तक पहुंचाना जरूरी है। संयुक्त मंत्री महामंडलेश्वर मनमोहन दास राधे-रोधे बाबा ने कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार आध्यात्मिकता, सेवा, त्याग, करुणा और सामाजिक समरसता है। संस्कृति संसद में परंपरा और आधुनिकता के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करने का प्रयास होगा।

छह प्रमुख आयामों में होंगे आयोजन
संस्कृति संसद को छह प्रमुख कार्यक्रमों में विभाजित किया गया है। इसमें मुख्य संस्कृति संसद, जेन-जी कॉन्क्लेव, प्रतिदिन सायंकालीन संस्कृति उत्सव, राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी तथा रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताएं शामिल हैं।

मुख्य सभागार में संतों और विद्वानों का विमर्श
रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर के मुख्य सभागार में तीनों दिन सुबह 10 से शाम चार बजे तक मुख्य सत्र आयोजित होंगे। इनमें संत, धर्माचार्य, विद्वान, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक चुनौतियों पर विचार रखेंगे।

जेन-जी कॉन्क्लेव में युवाओं की होगी प्रमुख भागीदारी
आयोजन का विशेष आकर्षण जेन-जी कॉन्क्लेव होगा। इसमें देशभर से आए युवाओं को अपनी बात रखने, सवाल पूछने और सांस्कृतिक विषयों पर संवाद करने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के अनुसार, इस कॉन्क्लेव में करीब 90 प्रतिशत वक्ता युवा पीढ़ी से होंगे, जबकि 10 प्रतिशत विशेषज्ञ और अनुभवी मार्गदर्शक शामिल रहेंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

शाम को सजेगा संस्कृति उत्सव
तीनों दिन शाम पांच से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित होगा। इसमें लोक एवं शास्त्रीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियां होंगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय चित्रकला और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी के जरिए भारतीय सभ्यता, ऐतिहासिक धरोहरों, तीर्थस्थलों और लोकजीवन की झलक दिखाई जाएगी। बच्चों और युवाओं के लिए रंगोली तथा चित्रकला प्रतियोगिताएं भी होंगी।

गंगा महासभा के तत्वावधान में आयोजित इस संस्कृति संसद को अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद सहित विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है। आयोजकों के अनुसार, काशी से उठने वाला यह सांस्कृतिक विमर्श भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान को मजबूत करने का माध्यम बनेगा।

BK Pathak
BK Pathak

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Beerkeshwar Pathak Journalist Beerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

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