सोरहिया व्रत का हुआ शुभारंभ, माता महालक्ष्मी के दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़, 16 दिन तक चलने वाले महाव्रत है विशेष महत्व
वाराणसी। काशी में शुक्रवार से सोरहिया व्रत का शुभारंभ हुआ। महालक्ष्मी की आराधना के लिए 16 दिवसीय इस महाव्रत को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। लक्सा स्थित लक्ष्मीकुंड मंदिर में माता महालक्ष्मी के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु महिलाओं व व्रतियों ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
पंकज मिश्रा के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर 12:16 बजे अष्टमी लगने के साथ महालक्ष्मी व्रत कथा का प्रारंभ हुआ। इसी के साथ 16 दिवसीय व्रत का पालन करने वाले भक्त महाव्रत की शुरुआत हुई।

राधाष्टमी पर भी व्रत रखने का विकल्प
जिन श्रद्धालुओं को व्रत के प्रथम और अंतिम दिन उपवास रखना है, वे 19 सितंबर को राधाष्टमी के दिन प्रथम व्रत रखेंगे। सोलहिया व्रत के दौरान 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस अवधि में श्रद्धालु विधि-विधान से माता महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना करेंगे।
जीवित्पुत्रिका व्रत तीन अक्टूबर को
पंचांग के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत तीन अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। इसके अगले दिन रविवार, चार अक्टूबर को सुबह 7:28 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकेगा। व्रत से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर श्रद्धालुओं में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
पांच अक्टूबर को श्रृंगार महोत्सव और भजन संध्या
सोरहिया दर्शन के समापन अवसर पर पांच अक्टूबर, सोमवार को लक्ष्मीकुंड मंदिर में श्रृंगार महोत्सव और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान माता महालक्ष्मी का विशेष श्रृंगार होगा और भक्त भजन-कीर्तन के माध्यम से आराधना करेंगे। लक्ष्मीकुंड मंदिर में दर्शन को लेकर विशेष उत्साह है। 16 दिवसीय व्रत के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। भक्त माता महालक्ष्मी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करेंगे।

