वाराणसी के जगदीशपुर गांव का बेटा बना वैज्ञानिक, यूपी कॉलेज से की पढ़ाई, IIT Mumbai में बना डेटा साइंटिस्ट

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वाराणसी। कहा जाता है कि सच्ची मेहनत और लगन के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं पाती। यह कहावत वाराणसी के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे समीर श्रीवास्तव पर पूरी तरह सटीक बैठती है। जिले की ग्राम पंचायत जगदीशपुर से निकलकर समीर ने देश के प्रतिष्ठित Indian Institute of Technology Bombay में चयन पाकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव और जनपद का नाम रोशन किया है।

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समीर श्रीवास्तव

किसान परिवार से वैज्ञानिक बनने तक का सफर
समीर श्रीवास्तव का जन्म ग्राम पंचायत जगदीशपुर में हुआ। उनके पिता मनोज कुमार श्रीवास्तव एक अधिवक्ता हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। समीर ने शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीरता दिखाई और कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।

शिक्षा की मजबूत नींव
समीर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नेशनल इंटर कॉलेज पिंडरा से हाईस्कूल के रूप में पूरी की। इसके बाद उन्होंने उदय प्रताप कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias College से बीटेक किया और फिर कोलकाता के Ramakrishna Paramahamsa Technology Institute से एमटेक की डिग्री हासिल की।

आईआईटी बॉम्बे में डेटा साइंटिस्ट के पद पर चयन
कड़ी मेहनत और निरंतर अध्ययन के बल पर समीर श्रीवास्तव का चयन Centre for Machine Intelligence and Data Science में डेटा साइंटिस्ट के पद पर हुआ है। वे 20 जनवरी को इस प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह उपलब्धि किसी भी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
अपनी सफलता का पूरा श्रेय समीर ने अपनी माता सुषमा श्रीवास्तव और पिता मनोज कुमार श्रीवास्तव को दिया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के सहयोग, संस्कार और मार्गदर्शन के बिना यह मुकाम संभव नहीं था। बेटे की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।

पिता बोले—मेहनत और ईमानदारी लाई रंग
समीर के पिता मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बेटे ने शिक्षा के प्रति जो ईमानदारी और अनुशासन दिखाया, वही उसकी सफलता की असली वजह है। उन्होंने कहा कि समीर की यह उपलब्धि उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

गांव और जनपद में खुशी की लहर
समीर श्रीवास्तव के आईआईटी बॉम्बे में चयन की खबर से गांव जगदीशपुर और आसपास के क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोग इसे गांव के युवाओं के लिए नई उम्मीद और प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। यह सफलता साबित करती है कि प्रतिभा किसी शहर या सुविधा की मोहताज नहीं होती, बल्कि मेहनत और लगन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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