बारिश में आदिकेशव घाट के खंडोक्त मंदिर की छत गिरी, मचा हड़कंप
वाराणसी। बीते कई दिनों से हो रही बारिश के कारण आदिकेशव घाट स्थित काशी खंडोक्त प्राचीन मंदिर की छत और शीर्ष का हिस्सा गिर गया। मंदिर के क्षतिग्रस्त होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चिंता है। गंगा और वरुणा नदी के संगम स्थल पर स्थित आदिकेशव क्षेत्र धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंदिर परिसर में अति प्राचीन चिंताहरण गणेश, श्री नक्षत्रेश्वर महादेव और श्री वेदेश्वर महादेव के विग्रह विराजमान हैं। मंदिर के नीचे श्वेत दीपेश्वर महादेव भी स्थित हैं। काशी खंड में आदिकेशव क्षेत्र और यहां स्थित देवालयों के धार्मिक महत्व का वर्णन मिलता है। ऐसे में मंदिर के क्षतिग्रस्त होने को काशी की पौराणिक और धार्मिक धरोहर के लिए महत्वपूर्ण क्षति के तौर पर देखा जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण मंदिर की पुरानी संरचना पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद छत और शीर्ष का हिस्सा गिर गया। गंगा किनारे स्थित कई प्राचीन मंदिर लंबे समय से संरक्षण और मरम्मत की आवश्यकता में हैं। समय रहते इनकी संरचनात्मक स्थिति की जांच और आवश्यक जीर्णोद्धार नहीं किया गया तो आने वाले समय में अन्य प्राचीन मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक शिवम अग्रहरि ने कहा कि गंगा किनारे स्थित सभी प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गंगा तट के देवालय काशी की पौराणिक पहचान और सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनमें से कई मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराने हैं और इनसे काशी की धार्मिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गंगा किनारे स्थित प्राचीन मंदिरों का सर्वे कराकर उनकी स्थिति का आकलन कराया जाए। जिन मंदिरों को तत्काल मरम्मत और संरक्षण की जरूरत है, वहां विशेषज्ञों की देखरेख में कार्य कराया जाए, ताकि बारिश और अन्य प्राकृतिक कारणों से ऐतिहासिक धरोहरों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। साथ ही क्षतिग्रस्त काशी खंडोक्त मंदिर की संरचना का भी शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।

