पुलिस कमिश्नर ने लोलार्क कुंड का किया निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा, मातहतों को दिए निर्देश 

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वाराणसी। भदैनी स्थित प्राचीन लोलार्क कुंड पर लोलार्क षष्ठी के मुख्य स्नान को लेकर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल बुधवार को बारिश के बीच लोलार्क कुंड पहुंचे। उन्होंने कुंड परिसर, बैरिकेडिंग, प्रवेश और निकास मार्ग तथा श्रद्धालुओं की कतार का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

गुरुवार को होने वाले स्नान से करीब 36 घंटे पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। बुधवार को हुई तेज बारिश भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं रोक सकी। दंपती बारिश में भीगते हुए कतार में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं।

पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
पुलिस आयुक्त के अनुसार लोलार्क षष्ठी पर करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं को एक साथ कुंड में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 25-25 के समूह में श्रद्धालुओं को स्नान के लिए भेजा जाएगा। इससे कुंड में एक समय में अधिक भीड़ एकत्र होने से रोकी जा सकेगी।

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सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब एक हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रवेश और निकास मार्ग पर अलग-अलग पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। बैरिकेडिंग के जरिए कतार को नियंत्रित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं।


आधी रात बाद होगी बाबा लोलार्केश्वर की आरती
लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत के अनुसार गुरुवार की मध्यरात्रि 12 बजे के बाद बाबा लोलार्केश्वर की भव्य आरती होगी। इसके बाद कुंड में मुख्य स्नान शुरू कराया जाएगा। स्नान के लिए पहले से ही श्रद्धालुओं को कतारबद्ध किया गया है। बुधवार से ही कुंड के आसपास भीड़ बढ़ने लगी थी।


संतान की कामना लेकर पहुंचते हैं दंपती
धार्मिक मान्यता के अनुसार लोलार्क षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड में स्नान और लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन-पूजन से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी दंपती यहां पहुंचते हैं। महंत के मुताबिक कई दंपती मनोकामना पूरी होने के बाद अपने बच्चों के साथ लोलार्क कुंड लौटते हैं और यहां मुंडन संस्कार कराते हैं। इससे इस धार्मिक स्थल से जुड़ी आस्था का पता चलता है।


सूर्य देव के रथ के चक्र से जुड़ी मान्यता
धार्मिक परंपरा में लोलार्क कुंड को सूर्य उपासना से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि देवासुर संग्राम के दौरान भगवान सूर्य के रथ का चक्र यहां गिरा था। इसी वजह से इस स्थान का नाम लोलार्क पड़ा और यहां लोलार्केश्वर महादेव की स्थापना मानी जाती है।


बारिश में भी नहीं टूटी श्रद्धालुओं की आस्था
बुधवार को तेज बारिश के दौरान भी कतार में खड़े श्रद्धालु अपने स्थान पर डटे रहे। कई दंपती पूजा सामग्री और परिवार के सदस्यों के साथ घंटों प्रतीक्षा करते नजर आए। पुलिस और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्ग से कुंड तक पहुंचाने और स्नान के बाद बाहर निकालने की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने भीड़ पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी स्थिति में अव्यवस्था न होने देने के निर्देश दिए हैं।

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