नगर निगम की कार्रवाई से फूल मंडी में उबाल, 40 साल पुरानी मंडी उजाड़ने का आरोप

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वाराणसी। नगर की प्रसिद्ध फूल मंडी में नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। मंडी के प्रमुख प्रतिनिधि विशाल दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नगर निगम की यह कार्रवाई न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से वैध रूप से संचालित मंडी को अचानक अतिक्रमण बताकर उजाड़ने की तैयारी की जा रही है।

40 वर्षों से संचालित मंडी, नगर निगम ने ही जारी किया था पीला कार्ड
विशाल दुबे ने बताया कि यह फूल मंडी पिछले लगभग 40 वर्षों से लगातार संचालित हो रही है। उनके अनुसार वर्ष 1988 में उनके पिता को नगर निगम द्वारा ही ‘पीला कार्ड’ जारी किया गया था, जिसमें उन्हें कथित मालिक के रूप में मान्यता दी गई थी। उसी आधार पर मंडी का संचालन होता रहा और आज तक कभी इसे अवैध नहीं बताया गया।

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1988 से अब तक नियमित टैक्स भुगतान का दावा
व्यापारियों का कहना है कि वे वर्ष 1988 से नगर निगम को सभी प्रकार के कर नियमित रूप से अदा करते आ रहे हैं। इसमें हाउस टैक्स और कमर्शियल टैक्स दोनों शामिल हैं। विशाल दुबे के मुताबिक चालू वर्ष का भी पूरा टैक्स जमा किया जा चुका है, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा अतिक्रमण का नोटिस देना समझ से परे है।

दस्तावेज दिए, फिर भी प्रशासन ने नहीं सुनी बात
मंडी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि नोटिस मिलने के बाद व्यापारियों ने अपने सभी साक्ष्य और वैध दस्तावेज नगर निगम के सामने प्रस्तुत किए, लेकिन प्रशासन ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। व्यापारियों का कहना है कि बिना उनकी बात सुने एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।

500 किसान सीधे, 1500 लोग परोक्ष रूप से जुड़े
फूल मंडी से जुड़े लोगों की संख्या को लेकर भी व्यापारियों ने गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार मंडी से प्रत्यक्ष रूप से लगभग 500 किसान जुड़े हुए हैं, जबकि परोक्ष रूप से 1500 से अधिक लोगों की रोज़ी-रोटी इसी पर निर्भर है। कुल मिलाकर 10 से 15 हजार लोगों का परिवार इस मंडी से चल रहा है।

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किराया वसूली की मंशा पर उठे सवाल
व्यापारियों ने प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशाल दुबे का कहना है कि उन्हें अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली कि नगर निगम अब इस स्थान से किरायेदारी वसूलना चाहता है। उन्होंने ‘अवैध वसूली’ के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मंडी में किसानों से केवल ₹25 मंडी शुल्क लिया जाता है, जबकि किसान यहां से हजारों रुपये का व्यापार करते हैं।

व्यवस्था न उजाड़ने की मांग, आजीविका बचाने की गुहार
फूल मंडी के व्यापारियों ने नगर निगम और प्रशासन से अपील की है कि वर्षों पुरानी इस व्यवस्था को न उजाड़ा जाए। उनका कहना है कि यदि मंडी हटाई गई तो सैकड़ों किसान और हजारों परिवार सड़क पर आ जाएंगे। व्यापारियों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनकी आजीविका की रक्षा करने की मांग की है।

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