लैंड पूलिंग योजना भूमि अधिग्रहण से है अलग, किसानों के लिए अधिकारी लाभकारी माडल है यह योजना, VDA उपाध्यक्ष ने दी जानकारी
वाराणसी। विकास प्राधिकरण (VDA) उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की अध्यक्षता में जिले के मढ़नी गांव में किसानों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें किसानों को लैंड पूलिंग योजना तथा आपसी सहमति के आधार पर भूमि क्रय की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इस योजना के माध्यम से होने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई। बैठक में बड़ी संख्या में किसान और काश्तकार मौजूद रहे, जिन्होंने रुचि के साथ योजना के विभिन्न पहलुओं को समझा।
उपाध्यक्ष ने बताया कि लैंड पूलिंग योजना पारंपरिक भूमि अधिग्रहण से अलग और किसानों के लिए अधिक लाभकारी मॉडल है। इस योजना के तहत किसानों की भूमि को जबरन अधिग्रहित नहीं किया जाता, बल्कि उनकी स्वैच्छिक सहभागिता और आपसी सहमति से नियोजित, संतुलित और दीर्घकालिक विकास किया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल क्षेत्र का समग्र विकास होता है, बल्कि किसानों को अपनी भूमि का बेहतर और बहुगुणित लाभ भी प्राप्त होता है।

बैठक में किसानों को अवगत कराया गया कि यह लैंड पूलिंग मॉडल लखनऊ की आईटी सिटी और वेलनेस सिटी में सफलतापूर्वक लागू की गई योजना पर आधारित है। उन परियोजनाओं में भूमि स्वामियों को पारंपरिक अधिग्रहण की तुलना में लगभग पांच से दस गुना तक अधिक लाभ मिलने की संभावना रही है। इसी अनुभव के आधार पर वाराणसी में भी इस योजना को लागू करने की तैयारी की जा रही है।
उपाध्यक्ष ने लैंड पूलिंग के अंतर्गत प्रस्तावित दो प्रमुख मॉडलों की विस्तृत जानकारी दी। पहले मॉडल के तहत 25 प्रतिशत पूर्णतः विकसित भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें संपूर्ण विकास कार्य जैसे सड़क, सीवर, जलापूर्ति, विद्युत, हरित क्षेत्र और अन्य बुनियादी सुविधाएं वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा कराई जाएंगी। विकास के बाद कुल भूमि का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा संबंधित किसान या भू-स्वामी को वापस सौंपा जाएगा, जिसमें किसी प्रकार का विकास शुल्क देय नहीं होगा।
दूसरे मॉडल में 50 प्रतिशत आंशिक रूप से विकसित भूमि देने का प्रावधान है। इस मॉडल में केवल बाह्य विकास कर कुल भूमि का 50 प्रतिशत विकसित भाग किसानों को प्रदान किया जाएगा। यह मॉडल विशेष रूप से उन भू-स्वामियों के लिए प्रस्तावित है, जिनके पास न्यूनतम 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि है। यह मॉडल भी लखनऊ पैटर्न के अनुरूप तैयार किया गया है।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रस्तावित टाउनशिप योजनाओं के अंतर्गत क्षेत्र का सेक्टर आधारित और चरणबद्ध विकास किया जाएगा। इसमें चौड़ी सड़कें, सीवर और जलापूर्ति व्यवस्था, पार्क, हरित क्षेत्र, सामुदायिक भवन और अन्य आधुनिक नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी, जिससे भविष्य में रहने और व्यवसाय की बेहतर संभावनाएं बन सकें।
बैठक के दौरान किसानों ने अपनी शंकाएं और सुझाव भी रखे। काश्तकारों की ओर से लैंड पूलिंग योजना में न्यूनतम एक-तिहाई विकसित भूमि देने की मांग सामने आई, जिसे प्राधिकरण ने गंभीरता से संज्ञान में लिया। उपाध्यक्ष ने किसानों को भरोसा दिलाया कि यह योजना पूरी तरह पारदर्शी, स्वैच्छिक और आपसी सहमति पर आधारित है तथा किसानों के हितों की रक्षा करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है।
अंत में उपाध्यक्ष ने किसानों से अपील की कि वे सहभागिता-आधारित इस लैंड पूलिंग योजना से जुड़कर न केवल अपने भविष्य को सुरक्षित करें, बल्कि वाराणसी को एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और भविष्य-उन्मुख शहर के रूप में विकसित करने में भी सहयोग प्रदान करें।

