काशिका उत्सव में बिखरी लोक संस्कृति की छटा, मालिनी अवस्थी के सुरों पर झूमे दर्शक
वाराणसी। टाउनहॉल स्थित अल्फ्रेड प्रेक्षागृह में रविवार शाम काशी की कला, संस्कृति और परंपराओं का रंग देखने को मिला। यहां आयोजित ‘काशिका उत्सव’ के तीसरे संस्करण में स्थानीय लोक संस्कृति और विश्वस्तरीय कला का अनूठा संगम प्रस्तुत किया गया। उत्सव में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज में सामने रखा।
कार्यक्रम का उद्देश्य काशी की लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाना है। उत्सव में शहर की पारंपरिक संस्कृति के साथ विभिन्न कलाओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। प्रेक्षागृह में मौजूद लोगों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति रही। मंच पर आते ही उन्होंने अपनी मधुर आवाज और लोकगीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति से माहौल को संगीतमय बना दिया। उनकी गायकी पर दर्शक मंत्रमुग्ध नजर आए। प्रस्तुति के दौरान पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति से पहले वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने उन्हें स्मृति चिह्न और दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान आयोजकों और उपस्थित अतिथियों ने भी उनका स्वागत किया। ‘काशिका उत्सव’ के जरिए काशी की सांस्कृतिक विविधता, लोककला और परंपराओं को मंच प्रदान किया जा रहा है।

