सोमवती अमावस्या और पुरुषोत्तम मास का महासंयोग : काशी के घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मंदिरों में दर्शन-पूजन कर बने पुण्य के भागी
वाराणसी। पुरुषोत्तम मास के समापन और सोमवती अमावस्या के दुर्लभ महासंयोग पर सोमवार को गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा तटों पर पहुंचने लगे। मां गंगा में पुण्य स्नान कर श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य और मंदिरों में दर्शन कर पुण्य के भागी बने।
काशी के प्रमुख घाटों पर सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिली। कई घाटों पर श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ रही कि कदम रखने तक की जगह नहीं बची। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु मंदिरों की ओर रवाना हुए, जहां दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

स्थानीय निवासी रमेश पांडे के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल अक्षय होता है। इसी आस्था के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना की।
पुरुषोत्तम मास के समापन पर घाटों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना व धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं में अंतिम दिन दर्शन करने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूरा गंगा तट क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय मां गंगे” के जयघोष से गुंजायमान रहा।

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। घाटों पर बैरिकेडिंग की गई, पुलिस बल तैनात रहा और नावों की निगरानी भी की गई। प्रशासन का प्रयास रहा कि श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से स्नान व दर्शन कर सकें।

