बीएचयू गेट पर महामना प्रतिमा के पास लगा फव्वारा बंद, छतरी जर्जर, लाखों के मेंटेनेंस के बावजूद बदहाल स्थिति पर उठ रहे सवाल
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लंका क्षेत्र स्थित मालवीय चौराहे पर स्थापित महामना की विशाल प्रतिमा और उसके आसपास की व्यवस्था इन दिनों उपेक्षा का शिकार दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों, छात्रों और राहगीरों का कहना है कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले इस स्थल की देखरेख पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

मालवीय चौराहा, जो सुंदरलाल चिकित्सालय ट्रॉमा सेंटर के समीप स्थित है, बीएचयू की प्रमुख पहचान में शामिल माना जाता है। यहां स्थापित महामना की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए वर्षों पहले एक बड़ी छतरी लगाई गई थी, लेकिन अब उसकी हालत जर्जर हो चुकी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छतरी को पतले लोहे के रॉड और रस्सियों के सहारे किसी तरह टिकाकर रखा गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

प्रतिमा के पास लगाया गया फव्वारा भी लंबे समय से बंद पड़ा है। कभी यह स्थल अपनी सुंदरता और आकर्षण के लिए जाना जाता था, लेकिन अब वहां अव्यवस्था का माहौल दिखाई देता है। बंद पड़े फव्वारे और खराब होती संरचनाओं को देखकर छात्र, मरीजों के परिजन और स्थानीय नागरिक निराशा जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्थान केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि महामना की स्मृतियों और बीएचयू की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल वीआईपी कार्यक्रमों या बड़े आयोजनों के दौरान ही अस्थायी तौर पर सफाई और मरम्मत का काम कराता है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद व्यवस्थाएं फिर पुराने हाल में पहुंच जाती हैं। लोगों का कहना है कि हर वर्ष विश्वविद्यालय में मेंटेनेंस और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आती है।

लोगों का मानना है कि महामना मदन मोहन मालवीय ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना देश के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक के रूप में की थी, उसी परिसर में उनकी प्रतिमा की यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। स्थानीय नागरिकों और छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि प्रतिमा स्थल की तत्काल मरम्मत कराई जाए, जर्जर छतरी को बदला जाए और बंद पड़े फव्वारे को फिर से शुरू कराया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा बनी रह सके।

