मणिकर्णिका घाट पर पुनर्निर्माण कार्य को लेकर जिला प्रशासन ने स्पष्ट की स्थिति, घाट की धार्मिक और पौराणिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा

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वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा है कि घाट पर स्थित सभी पौराणिक मंदिरों का समुचित संरक्षण करते हुए, अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की सुविधाओं के विकास का कार्य किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं और कथित फर्जी तस्वीरों को गलत बताते हुए प्रशासन ने पुनर्निर्माण कार्य को जनहित में बताया है।

भ्रामक सूचनाओं पर प्रशासन की सफाई
जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मणिकर्णिका घाट को लेकर सोशल मीडिया पर जो भ्रामक सूचनाएं और तस्वीरें प्रसारित की जा रही हैं, वे तथ्यहीन हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण के दौरान घाट की धार्मिक और पौराणिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसे संरक्षित और सुव्यवस्थित किया जा रहा है।

अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाओं का हो रहा विस्तार
प्रशासन के अनुसार परियोजना के अंतर्गत घाट पर प्लेटफॉर्म का विकास किया जा रहा है, जिससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सुचारु हो सके। इसके साथ ही शवदाह स्थल, लकड़ी भंडारण स्थल, पूजा सामग्री स्टोर और मुंडन स्थल जैसी आवश्यक सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है, ताकि घाट पर आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

घाट पर स्थित मठ का भी होगा पुनर्निर्माण
पुनर्निर्माण योजना में घाट पर स्थित मठ को भी शामिल किया गया है। प्रशासन ने बताया कि मठ का पुनर्निर्माण परंपरा और आस्था को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा, जिससे उसकी धार्मिक गरिमा बनी रहे।

प्रशासन ने सहयोग की अपील की
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि चल रहे पुनर्विकास कार्यों में सहयोग करें और किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें। प्रशासन का कहना है कि यह पूरा कार्य काशी की परंपरा, श्रद्धा और जनसुविधा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

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