स्वर्णमयी आभा से दमका मां कूष्मांडा का दरबार, सुर-लय-ताल से हुई भगवती की आराधना
वैदिक मंत्रोच्चार, शहनाई, बांसुरी और डमरुओं की गूंज के बीच तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का शुभारंभ
दुर्गाकुंड स्थित प्राचीन मां कूष्मांडा मंदिर में सजी स्वर्णमयी प्रतिमा का श्रद्धालुओं ने किया दर्शन,
पं. जवाहर लाल की शहनाई, भगीरथ जालान के गायन और पं. राजेंद्र प्रसन्ना की बांसुरी ने बांधा समां
वाराणसी। आदिशक्ति जगतजननी मां कूष्मांडा का दरबार मंगलवार को स्वर्णमयी आभा से दमक उठा। दुर्गाकुंड स्थित प्राचीन मां कूष्मांडा मंदिर में तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, शहनाई की मंगल धुनों, बांसुरी के मधुर स्वरों और डमरुओं की गड़गड़ाहट के बीच हुआ। मां के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवती के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।
लाल बनारसी साड़ी में सजीं मां कूष्मांडा
महोत्सव की पहली निशा में मां कूष्मांडा का विशेष श्रृंगार किया गया। मां को सुर्ख लाल बनारसी साड़ी और चुनरी धारण कराई गई। कोलकाता से मंगाए गए रजनीगंधा, गुलाब और बेला के पुष्पों से भव्य पुष्प श्रृंगार किया गया। स्वर्णमयी प्रतिमा पर फूलों और आभूषणों की सज्जा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।

वैदिक मंत्रों के बीच हुआ अभिषेक
मंदिर के महंत कौशल दुबे के सानिध्य और आचार्य बलभद्र तिवारी के आचार्यत्व में 11 वैदिक भूदेवों ने वेद पाठ किया। मंत्रोच्चार के बीच मां की स्वर्णमयी प्रतिमा का पंचामृत और पंचगव्य स्नान कराया गया। इसके बाद विधिवत पूजन-अर्चन और आरती हुई। मां के भोग के लिए हलवा और घुघरी के साथ छप्पन भोग की भव्य झांकी सजाई गई।
शहनाई से शुरू हुई संगीत आराधना
संगीत महोत्सव की पहली प्रस्तुति संगीत नाटक अकादमी सम्मान प्राप्त शहनाई वादक पं. जवाहर लाल ने दी। उन्होंने राग मारू विहाग में विलंबित तीनताल से प्रस्तुति शुरू की और मध्यलय व द्रुत लय में शहनाई की तान से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अंत में दादरा की बंदिश से प्रस्तुति को विराम दिया। शहनाई पर मोहनलाल एवं राजेश कुमार तथा तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती और डॉ. राजन ने संगत की।

भगीरथ जालान और पं. राजेंद्र प्रसन्ना ने मोहा मन
दूसरी प्रस्तुति पं. छन्नूलाल मिश्र के शिष्य उपशास्त्रीय गायक भगीरथ जालान की रही। उन्होंने गणेश वंदना से गायन की शुरुआत की। इसके बाद राग दरबारी में तीनताल के छोटे ख्याल की प्रस्तुति दी और अंत में मां का पचरा प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। तबले पर पं. ललित कुमार और हारमोनियम पर हर्षित उपाध्याय ने संगत की।
तीसरी प्रस्तुति दिल्ली के प्रसिद्ध बांसुरी वादक, ग्रैमी अवार्ड एवं संगीत नाटक अकादमी सम्मान प्राप्त पं. राजेंद्र प्रसन्ना की रही। उनकी बांसुरी से निकले मधुर स्वरों ने मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण को और गहराई प्रदान की।

देशभर के कलाकारों ने लगाई हाजिरी
महोत्सव में पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र के साथ उनके पुत्र देवब्रत मिश्र, पौत्र कृष्ण मिश्र और पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने भी प्रस्तुतियां दीं। पं. माता प्रसाद मिश्र, रविशंकर और ममता टंडन के कथक ने कला प्रेमियों को प्रभावित किया। अर्चना म्हस्कर, मधुमिता भट्टाचार्य और प्राप्ति पुराणिक ने भी मां के दरबार में अपनी कला अर्पित की।

आज कथक के बाद 28 कलाकार देंगे लोकगीतों की प्रस्तुति
बुधवार को संगीत समारोह में कथक नृत्यांगना अदिती चटर्जी की प्रस्तुति के बाद 28 कलाकार लोकगीतों, देवी गीतों और भजनों के माध्यम से मां की आराधना करेंगे। कार्यक्रम में रंजना राय, स्नेहा अवस्थी, फिरदौस खान, शैलबाला सरकार, रितीका पूजा, काजल लाडली, पिंकी मिश्रा, सुमन अग्रहरि, अशोक अनमोल, सूर्या सम्राट तिवारी, अमलेश शुक्ला, आस्था शुक्ला, रिया राज, सत्यम यादव, पारुल नंदा, कुसुम किशोरी, वंदना अनमोल, चंदन सिंह मधुर, अर्चना तिवारी, संजित सागर, कौशल सिंह, अमन पांडेय, सर्वेश लाल यादव, अजय अजनबी, मानसी श्रीवास्तव, खुशी मिश्रा और अन्नया मिश्रा प्रस्तुतियां देंगी।

