माघ मेले में सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट, घाटों पर विशेष निगरानी, तीन जोन में बांटे गए, रेड जोन में 13 घाट

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वाराणसी। माघ मेले के दौरान गंगा स्नान के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। काशी के कुल 84 प्रमुख घाटों को तीन अलग-अलग सुरक्षा जोन में विभाजित किया गया है। इनमें सबसे अधिक जोखिम वाले 13 घाटों को रेड जोन घोषित किया गया है, जहां विशेष सतर्कता और कड़ी निगरानी की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन के अनुसार माघ मेले में अमावस्या, मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा जैसे प्रमुख स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में हादसों की आशंका को देखते हुए घाटों को जोन में बांटने का निर्णय लिया गया। रेड जोन में शामिल घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी और गोताखोरों की तैनाती की गई है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है।

खतरनाक घोषित किए गए घाटों पर विशेष चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें गहरे पानी और तेज बहाव के प्रति लोगों को सतर्क किया जा रहा है। इसके अलावा प्रशासन द्वारा नावों की आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा गया है। केवल लाइफ जैकेट से लैस और पंजीकृत नावों को ही संचालन की अनुमति दी गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार पिछले एक वर्ष में गंगा घाटों पर हुए हादसों में 40 लोगों की डूबने से मौत हुई, जबकि जल पुलिस और राहत दलों ने तत्परता दिखाते हुए 154 लोगों की जान बचाई। इनमें सबसे अधिक घटनाएं तुलसी घाट, दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर सामने आईं। श्रद्धालुओं की भीड़ और गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि इन हादसों का प्रमुख कारण रही।

माघ मेले की अवधि करीब 44 दिनों की होती है, इस दौरान प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचते हैं। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग, कंट्रोल रूम, अस्थायी पुलिस चौकियां और स्वयंसेवकों की तैनाती की है। संवेदनशील घाटों पर मोबाइल टॉयलेट, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

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