पॉक्सो केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत, बटुकों में बांटी गई मिठाई

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वाराणसी। पॉक्सो एक्ट में बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। इससे शंकराचार्य के शिष्यों में खुशी का माहौल है। बुधवार को विद्यामठ में बटुकों में मिठाई बांटी गई। 

अग्रिम जमानत की खबर मिलते ही काशी स्थित विद्यामठ में उनके अनुयायियों और बटुकों के बीच उत्साह का माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ समर्थकों ने इसे “धर्म की जीत” बताया। इस अवसर पर बटुकों के बीच मिठाइयां बांटी गईं और शंकराचार्य का अभिनंदन किया गया। बड़ी संख्या में जुटे अनुयायियों ने खुशी जताते हुए इसे न्याय की दिशा में अहम कदम बताया।

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क्या है पूरा मामला
इस प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब आशुतोषानंद ने शंकराचार्य पर गंभीर आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि माघ मेले के दौरान शिविर में दो बटुकों के साथ यौन शोषण की घटना हुई। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

याचिका के दौरान वादी पक्ष ने कथित पीड़ितों को अदालत के सामने पेश कर अपने आरोपों को पुष्ट करने की कोशिश की। इस पूरे मामले ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा पैदा कर दी थी।

जमानत के बाद क्या बोले शंकराचार्य
अग्रिम जमानत मिलने के बाद शंकराचार्य ने मामले पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि कानून का दुरुपयोग कर लोगों को फंसाने की कोशिश की जाती है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया अंततः सत्य को सामने लाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे फैसले लोगों के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को मजबूत करते हैं। साथ ही उन्होंने यह संकेत दिया कि सनातन धर्म के विरोधियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन वे अपने कार्य में निरंतर लगे हुए हैं। फिलहाल, इस मामले में अदालत की सुनवाई आगे जारी रहेगी। अग्रिम जमानत मिलने के बाद जहां एक ओर समर्थकों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर यह मामला कानूनी और सामाजिक दृष्टि से चर्चा का विषय बना हुआ है।

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