81 दिवसीय धर्मयुद्ध यात्रा के बाद काशी पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, गौरक्षा आंदोलन पर करेंगे महत्वपूर्ण घोषणा

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वाराणसी। गौरक्षा के समर्थन में निकाली गई 81 दिवसीय "गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा" और लखनऊ में आयोजित "गौ गर्जना महासभा" के समापन के बाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शनिवार को काशी पहुंचे। उनके आगमन पर काशीवासियों, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जयघोष और पारंपरिक स्वागत के साथ उनका अभिनंदन किया।

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श्रद्धालुओं के आग्रह पर शंकराचार्य महाराज पालकी में सवार होकर हरिश्चंद्र घाट मार्ग से श्रीविद्यामठ पहुंचे। मठ में प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका आरती-पूजन किया। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि वे 24 से 27 जुलाई तक काशी प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान उनके सान्निध्य में विभिन्न आध्यात्मिक, धार्मिक और मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 27 जुलाई की शाम संत समाज और श्रद्धालुओं द्वारा उनके चरण पादुका पूजन, वंदन और अभिनंदन का विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होगा।

उन्होंने बताया कि शंकराचार्य महाराज 28 जुलाई को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां वे लगभग दो माह तक चातुर्मास्य व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। इस कारण इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वे काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। ऐसे में गुरु पूर्णिमा से पहले उनके चरण पादुका पूजन का अवसर मिलने से भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

रविवार दोपहर 2 बजे शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में शंकराचार्य महाराज पत्रकारों से संवाद करेंगे। इस दौरान वे गौरक्षा के लिए प्रस्तावित आंदोलन की रूपरेखा और आगामी रणनीति पर अपने विचार साझा करेंगे। माना जा रहा है कि इस संवाद में आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की घोषणा की जा सकती है। शंकराचार्य महाराज के स्वागत एवं धार्मिक कार्यक्रमों में साध्वी पूर्णांबा दीदी, स्वामी  प्रतूक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी, स्वामी निधिरव्यानंद सागर, देवेंद्र पाण्डेय, शैलेन्द्र योगी, सक्षम सिंह सहित बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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