बीएचयू आयुर्वेद संकाय में डीएसीपी पर सख्ती, एनसीआईएसएम ने कहा- नियमों से बाहर नहीं होगी कोई पदोन्नति

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय में डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) योजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रीय आयुर्वेद शिक्षा एवं अनुसंधान आयोग (एनसीआईएसएम) ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली में हुई सुनवाई के बाद भेजे गए पत्र में कहा गया है कि डीएसीपी योजना के तहत किसी भी प्रकार की पदोन्नति या करियर प्रोग्रेशन केवल एनसीआईएसएम के निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा। किसी भी स्तर पर नियामकीय प्रावधानों से समझौता स्वीकार नहीं होगा।

एनसीआईएसएम ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर समेत अन्य उच्च शैक्षणिक पदों पर पदोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और शिक्षण अनुभव की अनिवार्य शर्तों का हर हाल में पालन किया जाए। आयोग ने कहा कि एनसीआईएसएम (न्यूनतम मानक स्नातक आयुर्वेद शिक्षा विनियम-2022) के विनियम-17 के अनुसार प्रोफेसर पद के लिए कम से कम 10 वर्ष का नियमित शिक्षण अनुभव अथवा नियमानुसार निर्धारित अन्य योग्यताएं आवश्यक हैं। ऐसे में इन मानकों की अनदेखी कर की गई किसी भी पदोन्नति को नियामकीय व्यवस्था के विपरीत माना जाएगा।

आयोग ने अपने पत्र में बीएचयू के पूर्व रुख का भी उल्लेख किया है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 1994 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल शपथपत्र में स्वयं विश्वविद्यालय ने स्वीकार किया था कि आयुर्वेद संकाय पर तत्कालीन सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम), जो अब एनसीआईएसएम के रूप में कार्यरत है, के सभी नियम लागू होते हैं। इसके अलावा बीएचयू की डीएसीपी अधिसूचना के क्लॉज-7 का हवाला देते हुए भी स्पष्ट किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत आने वाले सभी शिक्षक संबंधित नियामक संस्था के नियमों के अधीन होंगे।

पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि डीएसीपी योजना का क्रियान्वयन किसी भी परिस्थिति में एनसीआईएसएम के मानकों से इतर न किया जाए। आयोग ने यह भी कहा है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी या प्रशासनिक विवाद उत्पन्न न हो।

एनसीआईएसएम ने अपने निर्देशों के साथ स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि आयोग के दिशा-निर्देशों और नियामकीय प्रावधानों का पालन नहीं किया गया तो एनसीआईएसएम अधिनियम-2020 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस पत्र के बाद बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में डीएसीपी योजना के क्रियान्वयन को लेकर चल रही बहस और तेज होने के आसार हैं, क्योंकि अब विश्वविद्यालय को प्रत्येक पदोन्नति में आयोग के मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना होगा।

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