रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर की जगह जांघ की कर दी सर्जरी, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने किया गलत ऑपरेशन, मरीज की मौत, लापरवाही की जांच शुरू 

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीज सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। पहचान में भ्रम के कारण एक महिला मरीज की गलत विभाग में सर्जरी कर दी गई, जिसके बाद उत्पन्न जटिलताओं के चलते 71 वर्षीय मरीज की 20 दिन बाद मौत हो गई।

एक ही नाम के दो मरीज  
अस्पताल में राधिका नाम के दो महिला मरीज अलग-अलग विभागों में भर्ती थीं। इनमें से एक मरीज न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती थीं, जिनका रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का ऑपरेशन प्रस्तावित था, जबकि दूसरी मरीज ऑर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती थीं। 7 मार्च 2026 को न्यूरोसर्जरी की मरीज को गलती से ऑर्थोपेडिक्स ऑपरेशन थिएटर में पहुंचा दिया गया।

123

बिना जरूरी जांच के शुरू कर दी सर्जरी
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑपरेशन से पहले मरीज की पहचान का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया। बिना आवश्यक जांच और पुष्टि के ऑर्थोपेडिक्स टीम ने सर्जरी शुरू कर दी। ऑपरेशन के दौरान जब डॉक्टरों को संबंधित बीमारी के अनुरूप कोई समस्या नहीं मिली, तब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद मरीज को तुरंत न्यूरोसर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

20 दिन बाद हुई मौत
गलत सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। उसे स्मृति ह्रास, दौरे पड़ना, जबड़े में जकड़न, मुंह में अल्सर और सांस लेने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद से ही मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ और स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती गई। अंततः 27 मार्च 2026 को मरीज को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट के बाद उसकी मौत हो गई।


मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह घटना न केवल लापरवाही का परिणाम है, बल्कि उपचार में देरी और अस्पताल स्टाफ के दुर्व्यवहार ने भी मरीज की स्थिति को और खराब किया। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जांच समिति पर उठे सवाल 
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस), बीएचयू प्रशासन ने जांच के लिए पहले तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। हालांकि, बाद में इस समिति में एक बड़ी खामी सामने आई। बताया गया कि प्रारंभिक समिति में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एक ऐसे चिकित्सक को शामिल किया गया था, जो स्वयं इस मामले में आरोपित टीम का हिस्सा थे। इस वजह से समिति का पुनर्गठन किया गया।

अब नई समिति कर रही जांच 
अब नई जांच समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता आईएमएस के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. अजीत सिंह कर रहे हैं। यह समिति पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कुलपति और आईएमएस डायरेक्टर ने सख्त कार्रवाई के दिए संकेत 
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि मामला संज्ञान में है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। वहीं, आईएमएस के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने इसे गंभीर घटना बताते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

एआई और डिजिटल सिस्टम के बावजूद हुई चूक 
बीते वर्ष ही ट्रॉमा सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सिस्टम की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य मरीजों की पहचान और इलाज प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना था। इसके बावजूद इस तरह की गंभीर चूक सामने आना अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी है।

Share this story