बाढ़ प्रभावित इलाकों में विशेष टीमें तैनात, पुलिस कमिश्नर ने लापरवाही पर कार्रवाई की दी चेतावनी
वाराणसी। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस की गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ ड्यूटी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाने के साथ लोगों की सुरक्षा और आवागमन पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

300 परिवारों के 1200 लोगों ने ली राहत शिविरों में शरण
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के अनुसार, बाढ़ राहत शिविरों में अब तक करीब 300 परिवारों के 1200 लोग शरण ले चुके हैं। प्रभावित लोगों के लिए शिविरों में भोजन, पेयजल, बिजली, बिस्तर, स्वच्छता और दवाओं की व्यवस्था की गई है। कम्युनिटी किचन के जरिए लोगों को तीनों समय भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले में संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 61 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं। इन शिविरों में राजस्व, स्वास्थ्य, पशुपालन, नगर निगम समेत विभिन्न विभागों की टीमें तैनात की गई हैं।

198 नावें और 21 बाढ़ चौकियां तैयार
आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 198 नावों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों से जलस्तर, आवागमन और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर जलस्तर की निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति में संबंधित विभागों को तत्काल अलर्ट करने की व्यवस्था की गई है।

NDRF, जल पुलिस और PAC मुस्तैद
प्रशासन ने गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए NDRF, जल पुलिस और PAC की टीमों को तैयार रखा है। प्रभावित इलाकों से लोगों की सुरक्षित निकासी और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन ने पशुधन की सुरक्षा के लिए भी चारा और उपचार की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग को राहत शिविरों में आवश्यक दवाएं और चिकित्सा दल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर, काशी आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को भी बढ़ते गंगा जलस्तर के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें श्रीकाशी विश्वनाथ के दर्शन तो हो गए, लेकिन बाढ़ के कारण नौका विहार नहीं कर पाने से मन उदास है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे तेज बहाव, जलभराव वाले क्षेत्रों और नदी के किनारे जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना दें।

