सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : संतों ने संस्कृति संरक्षण का किया आह्वान, रामदेव बोले, सनातन विरोधी राजनीतिक दलों का मिट जाएगा अस्तित्व
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में मंगलवार को आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ आध्यात्मिक संगोष्ठी में सनातन संस्कृति, राष्ट्र चेतना और भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण को लेकर संतों और धर्माचार्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, छात्रों, महिलाओं और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी रही। समारोह में आए संतों का स्वागत महिलाओं और बटुकों ने पुष्पवर्षा कर किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और पंडित मदन मोहन मालवीय को पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। मंच पर योग गुरु बाबा रामदेव, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती सहित कई संत मौजूद रहे।

योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म का विरोध करने वालों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि काशी की पवित्र धरती पर संतों के सान्निध्य में आना सौभाग्य की बात है। तमिलनाडु में सनातन धर्म को लेकर दिए गए विवादित बयानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों का भविष्य समाप्त होने की ओर है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अपने अस्तित्व को बचाना चाहता है तो उसे सनातन विरोध छोड़ना होगा।

बाबा रामदेव ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो सनातन परंपरा को जीवन में उतारते हैं, जबकि देश को ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत विश्वगुरु बनेगा और पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित होगी। कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव मंच पर योग मुद्राएं करते भी दिखाई दिए और उन्होंने संतों को दंडवत प्रणाम कर सम्मान व्यक्त किया।

स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि केवल सोमनाथ ही नहीं, बल्कि काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों पर भी इतिहास में अनेक आक्रमण हुए, लेकिन सनातन संस्कृति आज भी अडिग खड़ी है। उन्होंने कहा कि अब प्रहार केवल मंदिरों पर नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली, पूजा-पद्धति और परंपराओं पर हो रहे हैं। समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने इसे पश्चिमी प्रभाव बताते हुए भारतीय संस्कृति के लिए चुनौती करार दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि दोनों नेता भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत राष्ट्र बन रहा है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी का प्रतिनिधित्व किया है, तब से पूरी दुनिया का ध्यान काशी की ओर आकर्षित हुआ है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में करोड़ों श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं और अयोध्या भी विश्व स्तर पर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि अब लोग धर्म और आध्यात्मिकता की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ को भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मगौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर स्तंभ हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा विश्वनाथ धाम जहां सनातन की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण बनाए हुए है, वहीं सोमनाथ मंदिर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक है।

