सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम, लेकिन दुरुपयोग पर होगी कार्रवाई : रविंद्र जायसवाल

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को पत्रकारिता एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सोशल मीडिया और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर गंभीर चर्चा हुई। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि आज सोशल मीडिया के माध्यम से कोई भी घटना बहुत तेजी से आम लोगों तक पहुँच जाती है। यह अपनी बात कहने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसके नकारात्मक पहलू भी हैं। यदि कोई इसका दुरुपयोग करता है या समाज में नकारात्मकता फैलाता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

संवेदनशील रिपोर्टिंग समय की मांग
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि समाज और देशहित को प्राथमिकता देना पत्रकारिता का मूल दायित्व है। उन्होंने हाल की नेपाल की दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए संवेदनशील और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक दर्पण है और दर्पण ही पत्रकारिता है, जो समाज को उसका वास्तविक स्वरूप दिखाती है।

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लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है मीडिया
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए मंत्री ने कहा कि भारत में मीडिया के लिए कई कानून बनाए गए हैं, क्योंकि यह समाज को दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने मीडिया के ऐतिहासिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ इसके स्वरूप में निरंतर परिवर्तन हुआ है—पहले रेडियो, फिर अखबार और टेलीविजन का दौर आया, जिन्हें पारंपरिक माध्यम माना जाता है।

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गरिमामय वातावरण में संगोष्ठी का उद्घाटन
“सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता और जनसंचार के बदलते रुझान” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का शुभारंभ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण, दीप प्रज्वलन और कुलगीत के साथ हुआ। यह संगोष्ठी 18 जनवरी तक चलेगी, जिसमें देशभर से शिक्षाविद्, शोधार्थी और मीडिया विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। अतिथियों का स्वागत संगोष्ठी आयोजक प्रो. डॉ. बाला लखेंद्र, कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल और विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्रा ने किया।

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सोशल मीडिया से बढ़ रहा सूचना प्रदूषण: प्रो. राम मोहन पाठक
विशिष्ट अतिथि नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राम मोहन पाठक ने शीत युद्ध के दौर की प्रोपेगेंडा न्यूज़ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सोशल मीडिया पारंपरिक पत्रकारिता के मूल्यों को तोड़ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि तथ्य और सत्य के स्थान पर अफवाहें और भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर चुनौती है।

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तकनीक और भाषा में संतुलन जरूरी
काशी विद्यापीठ के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल उपाध्याय ने कहा कि भारत में पत्रकारिता की भूमिका ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रिंट मीडिया के भविष्य और भाषा के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि सही तालमेल से पत्रकारिता अधिक प्रभावी बन सकती है, हालांकि हिंदी प्रिंट मीडिया को सोशल मीडिया से कड़ी चुनौती मिल रही है।

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जिम्मेदार खबरें ही समाज की आवश्यकता
कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि खबरों को जिम्मेदारी के साथ समाज तक पहुँचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने केवल सच्ची और प्रमाणिक खबरों के प्रकाशन पर जोर देते हुए पत्रकारिता विभाग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

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निष्पक्षता और ईमानदारी से ही सार्थक है पत्रकारिता
पीएएसआई वाराणसी चैप्टर अध्यक्ष अनिल जादोदिया ने कहा कि पत्रकारिता तभी सार्थक है जब वह नीतिपरक, निष्पक्ष और ईमानदार हो। उन्होंने पुराने समय की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए कहा कि संवाददाताओं की कमी के कारण क्षेत्रीय खबरें अक्सर छूट जाती थीं, लेकिन आज तकनीक ने यह दूरी कम कर दी है।

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जहाँ एआई की सीमा खत्म होती है, वहीं से मानव सोच शुरू होती है
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कम्युनिकेशन टुडे के चीफ एडिटर संजीव भनावत ने कहा कि एक सच्चे पत्रकार को पत्रकारिता को अपने बच्चों की तरह स्नेह और जिम्मेदारी से देखना चाहिए। उन्होंने एआई, चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे टूल्स के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन चुनौतियों के बीच सोशल मीडिया का सही उपयोग ही आगे का रास्ता है।

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सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण की ताकत
नेपाल के काठमांडू से आए अंतरराष्ट्रीय वक्ता और टुडे यूथ एशिया के अध्यक्ष डॉ. संतोष शाह ने कहा कि सोशल मीडिया अब केवल सूचना का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह जनमत निर्माण और सामाजिक आंदोलनों को प्रभावित करने वाली एक शक्तिशाली ताकत बन चुका है। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश की हालिया घटनाओं का उदाहरण देते हुए इसके प्रभाव को रेखांकित किया।

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पहले दिन 40 शोध पत्र प्रस्तुत
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का संचालन आयोजन सचिव डॉ. बाला लखेंद्र ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया परंपरा का प्रतीक है और सोशल मीडिया आधुनिकता का। संगोष्ठी के पहले दिन विभिन्न सत्रों में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और छात्रों द्वारा 40 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। आगामी दिनों में 200 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

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