बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान, सुरक्षाकर्मियों से धक्कामुक्की
वाराणसी। बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। रविवार को आंदोलन के पांचवें दिन अभाविप की बीएचयू इकाई ने चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान चलाया। संगठन के अनुसार, अभियान में सैकड़ों विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर मांग के समर्थन में हस्ताक्षर किए। बीएचयू में अभाविप का यह धरना 23 सितंबर से जारी है और इसमें परिसर की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था तथा छात्रहित से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

अभाविप के मुताबिक, कार्यकर्ता जब विश्वनाथ मंदिर चौराहे पर हस्ताक्षर अभियान के लिए पहुंचे तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड और सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की हुई। संगठन ने दावा किया कि इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें भी आईं। हालांकि, इसके बावजूद अभियान जारी रहा और विद्यार्थियों से हस्ताक्षर कराए गए।
सैकड़ों विद्यार्थियों ने किया समर्थन
अभाविप के इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रहित से जुड़े विषयों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टोरियल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से विद्यार्थियों की समस्याओं पर संवाद स्थापित करने की मांग की।

इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास के बावजूद संगठन छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपनी मांगों पर समयबद्ध और लिखित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर अभाविप का विरोध प्रदर्शन पिछले दिनों भी सामने आया था। 23 सितंबर को केंद्रीय कार्यालय के सामने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की खबरें सामने आई थीं। संगठन ने चीफ प्रॉक्टर और प्रॉक्टोरियल बोर्ड में बदलाव के अलावा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शी कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
अभाविप का कहना है कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र प्रतिनिधियों के साथ संवाद करना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन विशेष आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

