काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर संवरेगा श्रीजगन्नाथ धाम, 41 माह में आकार लेगा भव्य कॉरिडोर

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वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के बाद अब काशी में एक और मंदिर परिसर बड़े कॉरिडोर का स्वरूप लेने जा रहा है। अस्सी स्थित प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर को भव्य श्रीजगन्नाथ कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का काम शुरू हो गया है। करीब 41 माह में प्रस्तावित परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य है। पहले चरण में करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। खास बात यह है कि इसे केवल दर्शन-पूजन तक सीमित मंदिर परिसर के बजाय आस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, आवास और भोजन की सुविधाओं वाले बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर संवरेगा श्रीजगन्नाथ धाम, 41 माह में आकार लेगा भव्य कॉरिडोर

ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी की ओर से तैयार योजना में श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है। कॉरिडोर में गुरुकुल से लेकर धर्मशाला, हेल्थ सेंटर, विशाल रसोई, प्रसाद ग्रहण स्थल, बहुउद्देश्यीय हॉल, सेंट्रल गार्डन, पार्किंग और प्रशासनिक भवन तक बनाए जाएंगे। प्रतिदिन करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद तैयार करने की क्षमता वाला कमर्शियल किचन भी इसकी बड़ी विशेषता होगा।

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गरुण मंदिर से शुरू हुआ कॉरिडोर का निर्माण

श्रीजगन्नाथ धाम के विस्तार की शुरुआत परिसर में गरुण मंदिर के निर्माण के साथ हो गई है। ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी के अनुसार गरुण मंदिर का बेस तैयार किया जा चुका है और अब पिलर खड़े करने का काम चल रहा है।

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कॉरिडोर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ काशी और श्रीजगन्नाथ मंदिर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा का भी ध्यान रखा जाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन के साथ विश्राम, भोजन, स्वास्थ्य और धार्मिक आयोजनों से जुड़ी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

10 हजार भक्तों का प्रसाद तैयार करने की क्षमता

प्रस्तावित कॉरिडोर में सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में विशाल रसोई होगी। भगवान श्रीजगन्नाथ के भोग के लिए अलग पारंपरिक रसोईघर बनेगा। इसमें परंपरा के अनुरूप लकड़ी के चूल्हे पर प्रभु का भोग तैयार किया जाएगा।इसके साथ ही बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनाने को आधुनिक कमर्शियल किचन बनाया जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिदिन करीब 10 हजार लोगों का प्रसाद तैयार करने की होगी। भोजन स्थल भी बनाया जाएगा, जहां एक समय में करीब 250 श्रद्धालु बैठकर प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। इससे रथयात्रा समेत बड़े पर्व और धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रसाद वितरण की व्यवस्था आसान होगी।

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वैदिक शिक्षा के लिए परिसर में खुलेगा गुरुकुल

कॉरिडोर की दूसरी बड़ी विशेषता गुरुकुल विद्यालय होगा। यहां विद्यार्थियों को वैदिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की योजना है। मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा को जोड़कर श्रीजगन्नाथ धाम को एक अलग पहचान देने की तैयारी है।

गुरुकुल के जरिए नई पीढ़ी तक पारंपरिक ज्ञान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इस तरह मंदिर केवल श्रद्धालुओं के दर्शन का केंद्र न रहकर शिक्षा का भी केंद्र बनेगा।

200 श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशाला

देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रीजगन्नाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए परिसर में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला भी बनाई जाएगी। इसमें करीब 200 लोगों के ठहरने की क्षमता होगी। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर के पास ही आवास मिल सकेगा।

परिसर में पुजारियों और कर्मचारियों के लिए जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। कार्यालय के साथ मुख्य द्वार के पास आवासीय परिसर और प्रशासनिक कार्यालय बनाने की योजना है।

धाम में ही मिलेगा प्राथमिक उपचार

श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए परिसर में हेल्थ सेंटर भी बनाया जाएगा। किसी श्रद्धालु की तबीयत खराब होने या आपात स्थिति आने पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा मंदिर परिसर में ही उपलब्ध कराने की योजना है।इसके अलावा बहुउद्देश्यीय हॉल और सेंट्रल गार्डन विकसित होगा। सेंट्रल गार्डन का इस्तेमाल सामाजिक कार्यों में भी किया जा सकेगा। यहां निर्धन परिवारों के विवाह समारोह आयोजित करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे श्रीजगन्नाथ धाम धार्मिक केंद्र के साथ सामाजिक सेवा के केंद्र की भूमिका भी निभाएगा।

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जलाभिषेक के लिए विशेष कुंड, धार्मिक आयोजनों के लिए विशाल लॉन

भगवान श्रीजगन्नाथ के जलाभिषेक के लिए विशेष कुंड बनाया जाएगा। वार्षिक उत्सवों और बड़े धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए विशाल लॉन विकसित करने की योजना है। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए छतरीयुक्त बेंच की व्यवस्था होगी, जहां करीब 200 लोग बैठ सकेंगे।परिसर में हस्तशिल्प, फूल और मिठाइयों के लिए विशेष कियोस्क भी बनाए जाएंगे। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को अपने उत्पाद श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

125 वाहनों की पार्किंग, 24 घंटे CCTV से निगरानी

कॉरिडोर बनने के बाद बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए पार्किंग की भी व्यवस्था की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार करीब 25 चारपहिया और 100 दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग विकसित होगी।सुरक्षा के लिए मुख्य द्वार पर गार्ड रूम बनाया जाएगा। पूरे परिसर को 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखने की योजना है। मंदिर और कॉरिडोर के प्रमुख स्थानों पर आधुनिक निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

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आस्था के साथ शिक्षा, सेवा और संस्कृति का केंद्र बनेगा धाम

श्रीजगन्नाथ कॉरिडोर की पूरी योजना इसे केवल मंदिर विस्तार तक सीमित नहीं रखती। मंदिर और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ गुरुकुल से शिक्षा, धर्मशाला से श्रद्धालुओं को आवास, हेल्थ सेंटर से स्वास्थ्य सुविधा और विशाल रसोई से भोजन की व्यवस्था एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की तैयारी है।करीब 41 माह में परियोजना पूरी होने के बाद अस्सी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बदला नजर आएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के बाद यह परियोजना काशी के धार्मिक पर्यटन में एक नया आकर्षण जोड़ने के साथ श्रीजगन्नाथ धाम को आस्था, शिक्षा, सेवा और संस्कृति के बड़े केंद्र के रूप में नई पहचान दे सकती है।

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