IIT BHU में ‘शिक्षा का अमृत’ कार्यशाला शुरू, वैश्विक स्तर की रणनीति पर जोर

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। आईआईटी बीएचयू में सोमवार को “शिक्षा का अमृत: आईआईटी (बीएचयू) के लिए रणनीतिक योजना एवं बेंचमार्किंग” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला संस्थान के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कमेटी रूम में आयोजित की जा रही है, जिसका संचालन आउटरीच एवं इंडस्ट्री रिलेशन सेल द्वारा किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव, प्रोफेसर इंचार्ज (आउटरीच एवं इंडस्ट्री रिलेशन) ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की दीर्घकालिक प्रगति के लिए ठोस रणनीतिक योजना, नियमित मूल्यांकन और वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली अत्यंत आवश्यक है।

123

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि (सेवानिवृत्त मुख्य वैज्ञानिक एवं पूर्व प्रबंध निदेशक, Philips Research North America सत्येंद्रनाथ मुखर्जी ने में कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में संस्थानों को नवाचार, रणनीतिक सोच और निरंतर बेंचमार्किंग को अपनाना होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों को बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप खुद को निरंतर विकसित करना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रो. शशांक शेखर मंडल तथा रजिस्ट्रार सुमित कुमार बिस्वास ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संस्थागत उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए स्पष्ट विजन, मजबूत मिशन और प्रभावी कार्यान्वयन योजनाएं अनिवार्य हैं।

उद्घाटन सत्र के बाद प्रो. सत्येंद्रनाथ मुखर्जी ने एक इंटरैक्टिव सत्र का संचालन किया, जिसमें पूर्व में तैयार संरचित प्रश्नावली के आधार पर प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया। इस दौरान शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा हुई, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

इसके बाद आयोजित व्याख्यान सत्र में विजन, मिशन, रणनीतिक कार्ययोजना, बेंचमार्किंग प्रक्रियाओं और प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (Key Performance Indicators - KPIs) के निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए संस्थागत नीतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।
 

कार्यशाला के अंतर्गत समूह चर्चा, असाइनमेंट और रणनीतिक योजनाओं के सामूहिक निर्माण जैसी व्यावहारिक गतिविधियां भी शामिल हैं, जिससे संकाय सदस्यों और अन्य हितधारकों की सहभागिता सुनिश्चित हो रही है।

यह तीन दिवसीय कार्यशाला आईआईटी (बीएचयू) की रणनीतिक दिशा को मजबूत करने, कार्यक्षमता बढ़ाने और शिक्षा व अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।

Share this story