काशी में बारिश के लिए शहनाई से साधना, इंद्रदेव को प्रसन्न करने को रीवा घाट पर गूंजा राग ‘मेघ’ 

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वाराणसी। भीषण गर्मी और उमस से बेहाल काशीवासियों को राहत दिलाने की कामना के साथ मंगलवार को रीवा घाट पर एक अनूठा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन किया गया। भगवान इंद्र को प्रसन्न कर वर्षा की कामना के उद्देश्य से शहनाई के सुरों में राग ‘मेघ’ की प्रस्तुति दी गई। इस विशेष अनुष्ठान ने घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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धर्म और संगीत की नगरी काशी में सदियों पुरानी परंपराओं के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व काशी विश्वनाथ मंदिर के शहनाई वादक पंडित महेंद्र प्रसन्ना और उनकी टीम ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मां गंगा के विधिवत पूजन-अर्चन से हुई। कलाकारों ने मां गंगा को पारंपरिक ‘पियरी’ अर्पित कर लोककल्याण, सुख-समृद्धि और समय पर वर्षा की प्रार्थना की।

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इसके बाद शहनाई पर राग ‘मेघ’ की प्रस्तुति शुरू हुई। भारतीय शास्त्रीय संगीत में राग मेघ का विशेष महत्व माना जाता है और लोकमान्यता है कि यह राग वर्षा ऋतु और बादलों से जुड़ा हुआ है। शहनाई से निकले मधुर और गंभीर स्वरों ने घाट के वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को ऐसा प्रतीत हुआ मानो सुरों के माध्यम से बादलों को काशी आने का निमंत्रण दिया जा रहा हो।

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राग मेघ की प्रस्तुति के पश्चात कलाकारों ने भक्ति और लोकभावनाओं से ओतप्रोत गीतों एवं भजनों का भी वादन किया। “इंद्र बरसो रे काशी नगरिया...” जैसे पारंपरिक भावों से जुड़े गायन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भी इस सांस्कृतिक अनुष्ठान में भावनात्मक रूप से जुड़ते नजर आए और वर्षा की कामना में सहभागी बने।

काशी की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं का भी प्रमुख केंद्र रही है। इतिहास गवाह है कि जब भी प्राकृतिक चुनौतियां या सामाजिक संकट सामने आए हैं, तब यहां के कलाकारों ने अपनी कला को लोककल्याण और ईश्वर आराधना का माध्यम बनाया है।

रीवा घाट पर आयोजित यह कार्यक्रम उसी जीवंत परंपरा का प्रतीक बना। शहनाई के सुरों, गंगा पूजन और वर्षा की प्रार्थना के इस अनूठे संगम ने काशी की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर उजागर किया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह प्रार्थना और सुर-साधना रंग लाएगी तथा जल्द ही मेघों की फुहारें काशीवासियों को भीषण गर्मी से राहत प्रदान करेंगी।

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