शारदीय नवरात्र : काशी विश्वनाथ धाम में भक्ति और संस्कृति का संगम, धुनुची नृत्य ने मोहा मन
नवरात्रि के चौथे दिन मां विशालाक्षी के लिए श्रृंगार सामग्री अर्पित, नवदुर्गा सप्तशती पाठ के बाद सजी सांस्कृतिक संध्या
वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ जारी है। बुधवार को नवरात्रि के चौथे दिन धाम में विधि-विधान से नवदुर्गा सप्तशती का पाठ संपन्न हुआ। वहीं, मां विशालाक्षी के निमित्त श्रृंगार सामग्री भगवान श्री विश्वेश्वर को अर्पित कराने के बाद प्रेषित की गई। सायंकाल आयोजित सांस्कृतिक संध्या में भक्ति संगीत और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

भक्तिमय प्रस्तुतियों से गूंजा मंदिर चौक
धाम स्थित मंदिर चौक (शंकराचार्य चौक) में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक मनोहारी बना दिया। सुश्री मीनाक्षी दीक्षित के संचालन में हुए कार्यक्रम में श्री राजन तिवारी और उनके सहयोगी कलाकारों ने भक्तिपूर्ण गीत प्रस्तुत किए। सुरों और भक्ति के संगम ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

पारंपरिक धुनुची नृत्य ने बिखेरी छटा
संगीत प्रस्तुतियों के बाद सुश्री अंकिता भट्टाचार्य के नृत्य समूह ने पारंपरिक धुनुची नृत्य प्रस्तुत किया। भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। कलाकारों की प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय लोक-सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध झलक देखने को मिली।

सनातन परंपराओं के संरक्षण पर जोर
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के अवसर पर आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य आध्यात्मिक चेतना को प्रोत्साहित करने के साथ भारतीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना है। इन आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
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