सावन 2026 : 30 जुलाई से शिवमय होगी काशी, बैजनत्था में विराजमान हैं वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति

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शिवालयों में विशेष तैयारियां, 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा सावन
 

चार सावन सोमवार और पांच-पांच बृहस्पतिवार-शुक्रवार का विशेष संयोग
 

रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, कांवड़ और पंचक्रोशी यात्रा का रहेगा विशेष महत्व
 

शिवालयों, घाटों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियां तेज

रिपोर्ट-ओमकारनाथ 

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी 30 जुलाई से शुरू हो रहे श्रावण मास के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है। पूरे माह चलने वाले इस पावन पर्व के दौरान श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के प्रमुख शिवालयों और देवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पूजन-अर्चन और दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। बनारस के बैजनत्था स्थित बैद्यनाथेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। इसे वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति भी माना जाता है। 

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श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान कांवड़िए गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा, पंचक्रोशी यात्रा, दुर्गा यात्रा और विभिन्न धार्मिक आयोजन पूरे उत्साह के साथ संपन्न होंगे। 

चार सोमवार का विशेष महत्व
इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।


•    पहला सोमवार: 3 अगस्त
•    दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
•    तीसरा सोमवार: 17 अगस्त
•    चौथा सोमवार: 24 अगस्त

इसके अलावा सावन में पांच बृहस्पतिवार (30 जुलाई, 6, 13, 20 और 27 अगस्त) तथा पांच शुक्रवार (31 जुलाई, 7, 14, 21 और 28 अगस्त) का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है।

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बैजनत्था मंदिर में विराजमान हैं वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति
कमच्छा स्थित प्राचीन बैजनत्था (वैद्यनाथ) मंदिर सावन में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र रहेगा। काशीखंड के अनुसार यह मंदिर झारखंड के देवघर स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है। मंदिर प्रतिदिन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तथा शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।

रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप का विशेष महत्व
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि सावन भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस दौरान रुद्राभिषेक, सामूहिक पार्थिव शिवलिंग पूजन, बेलपत्र अर्पण, सावन सोमवार व्रत, महामृत्युंजय मंत्र जाप और शिवमहापुराण कथा श्रवण का विशेष महत्व है। इन धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तों को आध्यात्मिक शांति, सुख-समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है।

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शिव यात्राओं के साथ निकलेंगी दुर्गा यात्राएं
बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय 'लिंगिया' ने बताया कि सावन भर काशी में भगवान शिव की उपासना का विशेष वातावरण रहता है। शिव यात्राओं के साथ-साथ दुर्गा यात्राएं निकालने की भी प्राचीन परंपरा है। श्रद्धालु व्रत, पूजन और जलाभिषेक के माध्यम से भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजेगी काशी
सावन शुरू होते ही काशी की गलियां "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष से गूंज उठेंगी। गंगा घाटों से लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम और अन्य शिवालयों तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देंगी। फूल, बेलपत्र, दूध, भांग, धतूरा, पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर भी विशेष रौनक रहेगी। धार्मिक आयोजनों के बीच पूरी काशी का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण शिवमय हो जाएगा। प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और विभिन्न धार्मिक संस्थाएं श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियों में जुटी हैं।

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