यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होगा सारनाथ, भारतीय प्रस्ताव पर जल्द होगा फैसला
वाराणसी। भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर इसी महीने पेरिस में होने वाली यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की बैठक में विचार किया जाएगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सारनाथ को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त हो जाएगा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल 19 से 29 जुलाई तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूनेस्को की बैठक में भाग ले रहा है। प्रतिनिधिमंडल में संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। भारत ने सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए जनवरी 2025 में विस्तृत डोजियर यूनेस्को को सौंपा था।
पिछले वर्ष सितंबर में यूनेस्को की विशेषज्ञ टीम ने तीन दिनों तक सारनाथ का दौरा कर यहां के पुरातात्विक अवशेषों, ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण कार्यों का गहन अध्ययन किया था। निरीक्षण के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट यूनेस्को को भेजी थी, जिसके आधार पर अब अंतिम निर्णय लिया जाएगा। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी और धौलावीरा सहित कई स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। यदि सारनाथ को भी यह मान्यता मिलती है तो यह उत्तर प्रदेश का एक और विश्वस्तरीय सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर स्थल बन जाएगा।
करीब ढाई हजार वर्ष पुराने सारनाथ में भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यहां स्थित धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ, प्राचीन विहार और अन्य बौद्ध अवशेष विश्वभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से सारनाथ की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

