संकटमोचन संगीत समारोह: मालिनी अवस्थी ने मनमोहक सुरों से की हनुमंत साधना, संतूर और तबले की जुगलबंदी में खोये श्रोता
वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध संकटमोचन संगीत समारोह की शुरुआत सोमवार की शाम महाकवि निराला रचित श्रीराम की शक्ति पूजा से हुई। नाट्य कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय, सजीव भाव-भंगिमाओं और मनमोहक नृत्य प्रस्तुति से अयोध्या-मिथिला से लेकर राम-रावण युद्ध तक के प्रसंग को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके बाद पंडित राहुल शर्मा ने संतूर और पंडित रामकुमार मिश्र ने तबले की जुगलबंदी से समां बांधा। वहीं पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपने मनमोहक सुरों से हनुमंत साधना की। चैती-ठुमरी की प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों को झूमने पर विवश कर दिया।

103वें संगीत समारोह की दूसरी प्रस्तुति में पद्मविभूषण पंडित शिवकुमार शर्मा के पुत्र पंडित राहुल शर्मा संतूर पर प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र के पुत्र पं. रामकुमार मिश्र ने तबले पर शानदार जुगलबंदी की। धुन पहाड़ी में कश्मिरी राग बजाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तीसरी प्रस्तुति दिल्ली से आई बनारस घराने की नृत्यांगना विधा लाल ने शंभू शिव शंभू स्वयंभू पर प्रस्तुति दी। तबले पर पं. उदय शंकर मिश्र, संवादिनी पर मोहित साहनी, सितार पर सिद्धांत चक्रवर्ती और सारंगी पर अंकित मिश्र ने संगत की।

पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने लंका जो धाय गयो से प्रस्तुति की शुरुआत की। नदिया तूं धीरे बो रे,रघुवर पहिरैं फूलन तोर सजना, रामजी पहिरैं बरस रही बुनिया, गंगा रेती पे बंगला छवाय दा मोरे राजा आदि गीतों की प्रस्तुति दी। हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर शुभ महाराज ने सधी हुई संगत से कार्यक्रम को और ऊंचाई दी।

चंदन किवाड़ का लोकार्पण
संकटमोचन संगीत समारोह में लोक गायिका मालिनी अवस्थी की लिखी किताब चंदन किवाड़ का लोकार्पण किया गया। महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि साहित्य की पहल संगीत और कला को समझने में मददगार होगी। वहीं मालिनी अवस्थी ने कहा कि जब लिखने का प्रण लिया तब बनारस में मेरी नजरों के सामने था। संकटमोचन संगीत समारोह के मंच और इस सिद्ध स्थल पर अपनी पुस्तक पर चर्चा होते देखना मेरे पिछले जन्मों के कर्मों का फल है। संगीत समारोह में पेंटिंग प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है, जो श्रोताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।

आज की प्रस्तुतियां
मेंडोलिन पर पं. यू राजेश, ड्रम पर पद्मश्री शिवमणि, मोहन वीणा पर पंडित विश्वमोहन भट्ट, सात्विक वीणा पर सलिल भट्ट, तबला पर जरगाम अकरम खां, उस्ताद गुमाम अब्बास खां का गायन, एकल तबला पर पंडित शुभ महाराज, सितार पर पंडित कुशल दास और गायन में पंडित रजत मोहन शर्मा की प्रस्तुतियां होंगी।




