संकटमोचन संगीत समारोह : जसपिंदर नरुला के भक्ति सुरों ने किया मंत्रमुग्ध, सुर ताल लय का दिया अद्भुत संगम 

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा भक्ति, शास्त्रीयता और लयकारी के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। जसपिंदर नरुला के भावपूर्ण गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी रात चले इस आयोजन में सुरों की साधना और ताल की गूंज ने हनुमत दरबार को संगीत की दिव्यता से सराबोर कर दिया।

123

कार्यक्रम की शुरुआत परंपरा के अनुसार भगवान हनुमान की आराधना और मंगलाचरण से हुई। इसके बाद मंच पर पहली प्रस्तुति उल्हास कशालकर ने दी। उन्होंने अपने गंभीर और पारंपरिक रागों के माध्यम से ग्वालियर घराने की विशिष्ट शैली प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने देर रात तक सराहा।

123

इसके बाद जसपिंदर नरुला ने मंच संभाला, जिनकी प्रस्तुति इस निशा की प्रमुख आकर्षण रही। उन्होंने भक्ति और शास्त्रीय संगीत का ऐसा समन्वय प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। उनके मधुर स्वर, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और सुरों की गहराई ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। हर बंदिश के साथ तालियों की गूंज से पूरा परिसर गूंजता रहा।

123

तीसरी प्रस्तुति में कौशिकी चक्रवर्ती ने अपने सधे हुए और मधुर स्वरों से श्रोताओं को बांधे रखा। उनकी गायकी में शास्त्रीयता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का संतुलन देखने को मिला। वाद्य संगीत की कड़ी में विवेक सोनार ने बांसुरी की मधुर धुनों से वातावरण को शांत और सुरमय बनाया। वहीं देबाशीष भट्टाचार्य ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। सरोद वादन में आलोक लाहिड़ी और अभिषेक लाहिड़ी की जुगलबंदी ने सुर और ताल का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

123

मंदिर परिसर में देर रात तक भक्तों और संगीत प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी रही। श्रोता पूरी तन्मयता से प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे और हर कलाकार का उत्साहवर्धन तालियों से करते रहे। छह दिवसीय समारोह 6 अप्रैल से 11 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के लगभग 150 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं। प्रतिदिन संध्या से लेकर सूर्योदय तक संगीत, नृत्य और वादन की प्रस्तुतियां इस सांस्कृतिक उत्सव को विशेष बना रही हैं।

123

123

123

123

Share this story