संकटमोचन संगीत समारोह : शिवमणि के ड्रम की धुन व विश्वमोहन भट्ट की वीणा की झंकार से झंकृत हुआ हनुमत दरबार, दूसरे दिन देश-विदेश के कलाकारों ने की संगीत साधना 

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वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा में देश-विदेश के कलाकारों ने हनुमत दरबार में संगीत साधना की। पद्मश्री शिवमणि के ड्रम वादन के साथ ही पंडित विश्वमोहन भट्ट की वीणा की झंकार से संकटमोचन मंदिर प्रांगण झंकृत हो उठा। अन्य कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को बांधे रखा। 

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103वें संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा का शुभारंभ पारंपरिक रीति से हुआ, जिसके बाद एक-एक कर कलाकारों ने अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुति दी। दूसरे दिन की पहली प्रस्तुति प्रसिद्ध मेंडोलिन वादक पंडित यू. राजेश ने की। उन्होंने राग आधारित मेंडोलिन वादन से कार्यक्रम का मंगलमय आरंभ किया। उनके वादन में मधुरता, तकनीकी दक्षता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति को शांत भाव से सुना और तालियों से स्वागत किया।

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इसके बाद विश्व विख्यात तालवादक पंडित शिवमणि ने ड्रम वादन की ऊर्जावान प्रस्तुति दी। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक तालों का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करते हुए अपनी लयकारी से श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। उनकी प्रस्तुति में गति, ऊर्जा और सटीकता का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। प्रख्यात संगीतज्ञ पंडित विश्व मोहन भट्ट ने मोहन वीणा वादन से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। उन्होंने गंभीर रागों की प्रस्तुति देकर संगीत की गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान मंदिर परिसर में पूर्ण शांति और एकाग्रता का वातावरण रहा।

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इसके पश्चात सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा वादन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने वादन में पारंपरिक शैली और नवीन प्रयोगों का समन्वय किया, जिससे श्रोताओं को संगीत की नई अनुभूति प्राप्त हुई। वहीं तबला वादक जरगाम अकरम खां ने तबला वादन की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। उन्होंने जटिल ताल संरचनाओं और तेज गति की लयकारी से अपनी तकनीकी दक्षता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को ताल की विविधता और सौंदर्य से परिचित कराया।

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इसके बाद उस्ताद गुलाम अब्बास खां ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। उन्होंने पारंपरिक रागों की प्रस्तुति देकर अपनी मधुर आवाज और गायकी की गहराई से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। छठवीं प्रस्तुति पंडित शुभ महाराज ने एकल तबला वादन की रही। उन्होंने अपनी लयकारी और ताल की विविधता से श्रोताओं को प्रभावित किया। उनकी प्रस्तुति में गति, संतुलन और सटीकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

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इसके पश्चात पंडित कुशल दास ने सितार वादन प्रस्तुत किया। उन्होंने राग की शुद्धता और तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया, जिससे श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति की भरपूर सराहना की। दूसरे दिन की अंतिम प्रस्तुति पंडित रतन मोहन शर्मा ने दी। उन्होंने शास्त्रीय गायन से कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन किया। उनकी गायकी में भक्ति, भाव और शास्त्रीय परंपरा का उत्कृष्ट संगम देखने को मिला।

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