सावन से पहले काशी में रुद्राक्ष का महाबाजार, तीन करोड़ दानों की खेप पहुंची, 30 करोड़ से अधिक का कारोबार
रिपोर्ट- ओमकार नाथ
वाराणसी। देवाधिदेव महादेव के प्रिय माह सावन की शुरुआत 30 जुलाई से होने जा रही है। इसके साथ ही शिव की नगरी काशी में रुद्राक्ष का बाजार पूरी तरह सजने लगा है। देशभर से आने वाले लाखों शिवभक्तों की आस्था को देखते हुए वाराणसी के प्रमुख बाजारों में करीब तीन करोड़ रुद्राक्ष की बड़ी खेप पहुंच चुकी है। व्यापारियों का अनुमान है कि इस बार सावन के एक महीने में रुद्राक्ष और उससे बने उत्पादों का कारोबार 30 करोड़ रुपये से अधिक का होगा।

गोदौलिया, विश्वनाथ गली, चौक, मैदागिन, दशाश्वमेध और गोलघर जैसे प्रमुख बाजारों में रुद्राक्ष की दुकानें सज चुकी हैं। व्यापारी महीनों पहले से नेपाल और इंडोनेशिया से रुद्राक्ष मंगाने की तैयारी में जुटे थे, ताकि सावन के दौरान बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
100 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक के रुद्राक्ष
दशाश्वमेध क्षेत्र की कारोबारी अंजली जायसवाल बताती हैं कि इस बार बाजार में 100 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक के रुद्राक्ष उपलब्ध हैं। श्रद्धालुओं की मांग के अनुसार एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक के रुद्राक्ष बिक्री के लिए आए हैं।

उन्होंने बताया कि नेपाल से आने वाले रुद्राक्ष अपनी विशेष बनावट, प्राकृतिक धारियों और धार्मिक महत्व के कारण अधिक कीमत पर बिकते हैं। वहीं सामान्य श्रद्धालुओं के लिए भी किफायती दरों पर विभिन्न प्रकार की मालाएं और कंठियां उपलब्ध कराई गई हैं।
नेपाल और इंडोनेशिया से पहुंची बड़ी खेप
चौखंभा की कारोबारी रश्मि सेठ के अनुसार इस वर्ष नेपाल और इंडोनेशिया से रुद्राक्ष की बड़ी खेप वाराणसी आयात की गई है। नेपाल से आने वाले बड़े आकार और गहरी धारियों वाले एक मुखी से चौदह मुखी रुद्राक्ष ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं, इसलिए उनकी कीमत अधिक होती है। वहीं इंडोनेशिया से आने वाले छोटे, चिकने और हल्के रुद्राक्ष के दानों की मांग कंठी माला, कंगन और अन्य धार्मिक आभूषण बनाने के लिए सबसे अधिक है।

इन बाजारों में सबसे अधिक मांग
गोलघर क्षेत्र के कारोबारी सुमित जायसवाल के अनुसार इस बार सबसे अधिक मांग गोदौलिया, विश्वनाथ गली, चौक, मैदागिन और दशाश्वमेध के बाजारों में देखने को मिल रही है। सावन के दौरान देशभर से आने वाले श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ रुद्राक्ष खरीदना शुभ मानते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में कारोबार कई गुना बढ़ जाता है।
मंदिरों में होगा रुद्राक्ष का भव्य श्रृंगार
इस बार सावन में केवल श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि मंदिरों में भी रुद्राक्ष का विशेष महत्व रहेगा। काशी विश्वनाथ मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, सारंगनाथ महादेव, केदारेश्वर महादेव सहित जिले के प्रमुख शिवालयों में भगवान शिव का रुद्राक्ष से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। श्रद्धालु और विभिन्न सेवा समितियां बाबा विश्वनाथ तथा अष्टभैरव मंदिरों में सवा लाख से लेकर 11 लाख रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित करने के लिए पहले ही बुकिंग करा चुकी हैं।
रुद्राक्ष से सजेगा बाबा कालभैरव का गर्भगृह
कालभैरव मंदिर के महंत मोहित योगेश्वर ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार पर बाबा कालभैरव के गर्भगृह और पूरी पीठ को रुद्राक्ष की मालाओं से भव्य रूप से सजाया जाएगा। इसके लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। रुद्राक्ष से होने वाला यह अलौकिक श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
आस्था और व्यापार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
सावन के आगमन के साथ काशी में धार्मिक पर्यटन भी अपने चरम पर पहुंचने की उम्मीद है। लाखों श्रद्धालुओं की आमद से रुद्राक्ष कारोबारियों, पूजा सामग्री विक्रेताओं और स्थानीय व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। आस्था के इस पर्व पर काशी एक बार फिर शिवभक्ति, आध्यात्मिकता और धार्मिक व्यापार के अनूठे संगम का साक्षी बनेगी।

