काशी में शिवाजी जयंती के साथ गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा का संकल्प, 11 मार्च को लखनऊ में मुख्य कार्यक्रम
वाराणसी। गौमाता को राज्यमाता घोषित करने और प्रदेश में पूर्ण रूप से गोहत्या बंद कराने की मांग को लेकर प्रस्तावित गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद कार्यक्रम की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में 6 मार्च, शुक्रवार को सायंकाल 5 बजे शंकराचार्य घाट पर हिंदू तिथि के अनुसार गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जाएगी। यह आयोजन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में संपन्न होगा। कार्यक्रम के अंतर्गत लघु नाटिका, छत्रपति शिवाजी की बिरुदावली का वाचन, गंगा पूजन, संतों और विद्वानों के उद्बोधन तथा शंकराचार्य के आशीर्वचन होंगे। इस अवसर पर गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के संकल्प की भी घोषणा की जाएगी।
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ समाचार पत्रों में भूलवश गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के शंखनाद की तिथि 12 मार्च प्रकाशित हो गई थी, जिससे गौभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि लखनऊ में मुख्य कार्यक्रम 11 मार्च को ही आयोजित होगा और उसी दिन धर्मयुद्ध शंखनाद किया जाएगा।
कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा भी जारी की गई है। 6 मार्च को काशी में संकल्प दिवस मनाया जाएगा, जिसमें गंगा पूजन कर गोप्रतिष्ठा के लिए धर्मयुद्ध शंखनाद का संकल्प लिया जाएगा। इसके बाद 7 मार्च की सुबह श्री विद्या मठ से यात्रा का प्रस्थान होगा। यात्रा की शुरुआत संकटमोचन मंदिर में हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ के साथ होगी, जहां विघ्नों के नाश की प्रार्थना की जाएगी।
यात्रा के दौरान कई जिलों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। 7 मार्च को जौनपुर और सुल्तान में सभाएं करते हुए यात्रा रायबरेली पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा। 8 मार्च को रायबरेली से मोहनलालगंज, लालगंज और अचलगंज होते हुए यात्रा उन्नाव पहुंचेगी। 9 मार्च को उन्नाव से बांगरमऊ और बघौली होते हुए यात्रा नैमिषारण्य पहुंचेगी, जहां सभा और रात्रि विश्राम का कार्यक्रम है। इसके बाद 10 मार्च को नैमिषारण्य से सिधौली और इटौंजा होते हुए यात्रा लखनऊ की सीमा में प्रवेश करेगी।
मुख्य कार्यक्रम 11 मार्च को लखनऊ स्थित कांशीराम स्मृति उपवन में दोपहर 2:15 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मंगलाचरण, गोमय गणेश पूजन, गो-ध्वज प्रतिष्ठा और धर्मयुद्ध शंखनाद के साथ संतों, विद्वानों और गोभक्तों के संबोधन होंगे। आयोजकों का कहना है कि गौमाता की प्रतिष्ठा और संरक्षण के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। उनका मानना है कि शासन की उदासीनता गौभक्तों के धैर्य की परीक्षा ले रही है और 11 मार्च का लखनऊ कार्यक्रम इस मुद्दे पर एक निर्णायक चेतावनी साबित होगा।

