रंगभरी एकादशी : हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली, शोभायात्रा में देसी-विदेशी श्रद्धालुओं संग साधु-सन्यासियों व युवाओं की टोली, देखिये तस्वीरें 

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वाराणसी। काशी में रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर भक्ति, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को बाबा मसान नाथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसका विधिवत समापन ऐतिहासिक राजा हरिश्चंद्र घाट पर हुआ। यहां ‘मसाने की होली’ का अलौकिक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और आस्था का केंद्र बना रहा।

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प्रातः 10 बजे रवींद्रपुरी स्थित बाबा कीनाराम आश्रम से प्रारंभ हुई शोभायात्रा आईपी विजया, भेलूपुर और सोनारपुरा होते हुए हरिश्चंद्र घाट पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने रंग-गुलाल उड़ाकर और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ बाबा का स्वागत किया। डमरू दल, बैंड पार्टी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से वातावरण शिवमय हो उठा।

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समिति के आयोजक एवं संस्थापक पवन चौधरी ने बताया कि रंगभरी एकादशी की यह शोभायात्रा काशी में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। उनके अनुसार, “आज से काशी में बाबा भोलेनाथ के साथ होली का शुभारंभ हो जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।”

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हरिश्चंद्र घाट पर ‘मसाने की होली’ का अलौकिक दृश्य
शोभायात्रा का सबसे विशेष और आध्यात्मिक क्षण तब आया जब बाबा मसान नाथ की सजीव झांकी हरिश्चंद्र घाट पहुंची। श्मशान स्थल पर खेले जाने वाली ‘मसाने की होली’ ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं भोलेनाथ अपने गणों के साथ श्मशान में रंगों की होली खेल रहे हों। घाट पर पहुंचते ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष किया। कपाली बाबा के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजन-अर्चन और आरती संपन्न हुई। श्मशान की गंभीरता के बीच रंग और भक्ति का यह अनूठा संगम काशी की विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान को दर्शाता है। यहां की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के दार्शनिक सत्य को स्वीकार करने का प्रतीक मानी जाती है।

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झांकियों और श्रद्धालुओं की रही विशेष भागीदारी
यात्रा में साधु-संतों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। बड़ी संख्या में युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं और भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं। कई श्रद्धालु भगवान शंकर, माता पार्वती, गणेश, काली और दुर्गा के रूप में सजे हुए थे, जिससे पूरी शोभायात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो गई। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखाई दिए। समिति की ओर से मार्ग में जलपान और नाश्ते की व्यवस्था भी की गई थी।

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गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर आर. शुक्ला (न्यायाधीश), पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, पंकज सिंह उर्फ डब्लू, केशव जालान, निधि देव, संतोष पाल, वेदवती माधुरी, सरवन भारद्वाज, सेनू बाबा, प्रदीप साहनी, संजय सिंह, अंशुमान जायसवाल, मुनि पटेल, तमन राय, विनोद कुमार गौड़, बबलू शुक्ला सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। समिति के सदस्यों ने शोभायात्रा को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने में अहम भूमिका निभाई।

तस्वीरें ...

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