रामनगर की रामलीला : तैयारियां तेज, 18 जुलाई को होगा प्रमुख पात्रों का चयन, 25 सितंबर से शुरू होगी विश्वविख्यात लीला
वाराणसी। रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला की तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। काशीराज परिवार ने रामलीला के प्रमुख पात्रों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर और गाजीपुर जनपदों के लगभग तीन दर्जन मठों को सूचना भेजकर योग्य बालकों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। परंपरागत विधि से होने वाला यह चयन 18 जुलाई को रामनगर किला स्थित जवाहरखाना परिसर में आयोजित किया जाएगा।
8 से 14 वर्ष तक के होंगे पात्र
पात्र चयन के लिए 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालकों को आमंत्रित किया गया है। चयन के दौरान प्रतिभागियों की संस्कृत श्लोकों और श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों के शुद्ध एवं स्पष्ट उच्चारण की परीक्षा ली जाएगी। इसके साथ ही उनकी आवाज की मधुरता, संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा, मंचीय प्रस्तुति और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप अभिनय क्षमता का भी आकलन किया जाएगा। इसी आधार पर रामलीला के पांच प्रमुख पात्रों का चयन होगा।

चारों भाइयों और सीता के पात्र का चयन
रामनगर रामलीला में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के पात्रों को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इन भूमिकाओं के लिए चुने जाने वाले बालक पूरे आयोजन के केंद्र में रहते हैं और रामलीला की परंपरा के संवाहक माने जाते हैं। यही वजह है कि चयन प्रक्रिया पूरी गंभीरता और पारंपरिक नियमों के अनुसार संपन्न कराई जाती है।
वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर और गाजीपुर में ढूंढे जा रहे पात्र
काशीराज परिवार की ओर से वाराणसी के सिगरा, चितईपुर, मैदागिन, सोनिया, लक्सा, चौखंभा और लंका क्षेत्र के मठों के अलावा मिर्जापुर के चुनार, नारायणपुर और विशेषपुर, चंदौली के मुगलसराय, गोधना और मारूफपुर तथा गाजीपुर के जमानिया सहित विभिन्न मठों को सूचना भेजी गई है। इन मठों से पूर्व वर्षों में भी कई प्रतिभाशाली बालकों का चयन रामलीला के प्रमुख पात्रों के रूप में हो चुका है।

गणेश पूजन से शुरू होंगी औपचारिकताएं
धार्मिक परंपरा के अनुसार 2 अगस्त को प्रथम गणेश पूजन के साथ रामलीला की औपचारिक तैयारियां आगे बढ़ेंगी। इसके बाद 14 सितंबर को द्वितीय गणेश पूजन आयोजित किया जाएगा। वहीं, 25 सितंबर को रावण जन्म प्रसंग के मंचन के साथ रामनगर रामलीला 2026 का विधिवत शुभारंभ होगा। इसके बाद लगभग एक माह से अधिक समय तक विभिन्न प्रसंगों का मंचन पारंपरिक शैली में किया जाएगा।
चयनित पात्रों को 45 दिनों का प्रशिक्षण
प्रथम गणेश पूजन के बाद चयनित पात्रों को गंगा तट स्थित बलुआ घाट धर्मशाला में करीब 45 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान संवाद बोलने की शैली, अभिनय, भाव-भंगिमा, मंच संचालन, स्वर की स्पष्टता, शारीरिक मुद्राओं और धार्मिक अनुशासन का अभ्यास कराया जाएगा, ताकि मंचन के दौरान पात्रों का अभिनय प्रभावशाली और परंपरा के अनुरूप हो सके।
200 वर्षों से अधिक पुरानी रामलीला
करीब दो शताब्दियों से भी अधिक पुरानी रामनगर रामलीला भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और लोक परंपरा का अनूठा उदाहरण मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरी रामलीला प्राकृतिक स्थलों और वास्तविक परिवेश में मंचित होती है, जिससे दर्शकों को त्रेतायुग की घटनाओं का सजीव अनुभव होता है। यही कारण है कि हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, शोधकर्ता और पर्यटक इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को देखने रामनगर पहुंचते हैं।

