Ramnagar ki Ramlila : रावण के जन्म के साथ शुरू हुई रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला, ब्रह्मा से वरदान पाकर दशानन ने मचाया आतंक, देवता पहुंचे बैकुंठ

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- कुंभकर्ण ने छह माह सोने, रावण ने मांगा मनुष्य-बानर से ही मृत्यु का वरदान

- रावण के अत्याचार से देवलोक और धरती पर मचा हाहाकार, गाय के रूप में पृथ्वी ने ब्रह्मा जी से लगाई गुहार

- रामचरितमानस की चौपाइयों के गायन ने बांधा माहौल, विराम के बाद सजी क्षीर सागर की भव्य झांकी

- कुंवर अनंत नारायण सिंह रहे मौजूद, क्षीर सागर की भव्य झांकी ने मोहा मन


वाराणसी। विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का शुभारंभ शुक्रवार को रावण के जन्म के साथ हुआ। रामबाग के मुख्य द्वार के पास शाम पांच बजे शुरू हुई लीला में रावण के जन्म से लेकर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने और उसके अत्याचार से देवलोक व धरती पर मचे हाहाकार का प्रभावी मंचन किया गया। लीला के दौरान काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह की मौजूदगी में रामलीला प्रेमियों ने धार्मिक प्रसंगों का आनंद लिया।

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रावण ने मांगा मनुष्य-वानर से ही मृत्यु का वरदान
लीला की शुरुआत रावण के जन्म से हुई। जन्म के बाद रावण ने यज्ञ किया। उसके तप और यज्ञ से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और इच्छित वरदान मांगने को कहा। रावण ने ऐसा वरदान मांगा कि मनुष्य और वानर के अलावा कोई उसका वध न कर सके। ब्रह्मा जी के तथास्तु कहते ही रावण स्वयं को अजेय समझने लगा।

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इसके बाद कुंभकर्ण ने भी ब्रह्मा जी से छह महीने सोने और एक दिन जागने का वरदान मांगा। लीला में ब्रह्मा जी की ओर से लंकनी को राक्षस राज के भविष्य का संकेत देने का प्रसंग भी दिखाया गया। बताया गया कि एक समय वानर के हाथों राक्षस राज के अंत की शुरुआत होगी।

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वरदान मिलते ही बढ़ा रावण का आतंक
वरदान मिलने के बाद रावण के अत्याचार बढ़ने लगे। उसने देवलोक में भी अपना प्रभाव जमाना शुरू कर दिया। लीला में कुबेर से पुष्पक विमान छीनने और देवताओं में भय व्याप्त होने का प्रसंग मंचित हुआ। रावण के आतंक से परेशान होकर देवराज इंद्र देवताओं के साथ बैकुंठ की ओर चले गए। धरती भी रावण के अत्याचार से व्यथित दिखाई गई। गाय का रूप धारण कर पृथ्वी ब्रह्मा जी के पास पहुंची और राक्षसराज के अत्याचारों से मुक्ति की गुहार लगाई।

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चौपाइयों के गायन के बाद लगा विराम
रामलीला के दौरान श्रीरामचरितमानस के बालकांड की चौपाइयों का गायन हुआ। इसके बाद लीला में करीब एक घंटे का विराम दिया गया। इस दौरान रामलीला प्रेमियों ने मेले में खरीदारी और खानपान का आनंद लिया। एक घंटे के विराम के बाद लीला का अगला प्रसंग शुरू हुआ। इस दौरान क्षीर सागर की भव्य झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं और रामलीला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। रावण के जन्म से शुरू हुई लीला के साथ रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला के अगले प्रसंगों की कड़ी आगे बढ़ी।

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