Ramnagar ki ramlila: टूटा शिवधनुष, गूंजा जयघोष, परशुराम के फरसे से सहमे राजाओं ने छोड़ा दरबार

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सीता की प्रार्थना पर प्रभु श्रीराम ने रघुकुल की मर्यादा निभाई, धनुष भंग होते ही जनकपुर से त्रिलोक तक छाया उल्लास

 

परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां, श्रीराम के स्वरूप का भान होते ही परशुराम ने किया समर्पण

 

वाराणसी। रामनगर की विश्वविख्यात रामलीला के पांचवें दिन मंगलवार को जनकपुर की धरती पर वह अलौकिक क्षण साकार हुआ, जिसका इंतजार लीला प्रेमियों को वर्ष भर रहता है। राजाओं की शक्ति जहां शिवधनुष को तिनके भर भी न डिगा सकी, वहीं प्रभु श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर सहज भाव से धनुष उठाया और देखते ही देखते उसके भंग होने की गर्जना से तीनों लोक गूंज उठे। धनुष भंग के साथ ही सीता-राम मिलन का मंगल दृश्य साकार हुआ और पूरा लीला परिसर भक्ति, उल्लास और जयघोष से भर उठा।

राजाओं की शक्ति हुई निष्फल, जनक का धैर्य डोला
जनकपुरी के दरबार में महाराज जनक की प्रतिज्ञा सुनकर देश-विदेश से आए राजा एक-एक कर शिवधनुष उठाने का प्रयास करते हैं। किसी ने उसे हिलाने की कोशिश की तो कोई अपनी पूरी शक्ति लगा बैठा, लेकिन धनुष टस से मस नहीं हुआ। राजाओं की विफलता से जनक व्यथित हो उठे। उन्हें लगा कि क्या धरती वीरों से विहीन हो गई है। महाराज जनक और माता सुनैना की व्याकुलता देख लक्ष्मण के भीतर का क्षत्रियत्व जाग उठा। उन्होंने क्रोध में धनुष भंग करने की अनुमति मांगी। श्रीराम के संकेत मात्र से लक्ष्मण शांत हो गए और गुरु विश्वामित्र की आज्ञा की प्रतीक्षा करने लगे।

सीता की प्रार्थना, राम का संकल्प
गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष की ओर बढ़े। उधर माता सीता का मन आशंका और प्रार्थना के बीच डोल रहा था। उन्होंने भोलेनाथ, माता गौरी और धरती माता से मन ही मन प्रार्थना की कि उनकी मनोकामना पूर्ण हो। प्रभु ने सीता के अंतर्मन की पुकार जानी और सहजता से शिवधनुष को उठाया। क्षणभर में धनुष भंग हुआ। उसकी प्रचंड ध्वनि से जनकपुरी ही नहीं, मानो आकाश-पाताल तक गुंजायमान हो उठा। लीला स्थल पर जय श्रीराम के उद्घोष के बीच सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में जयमाला डाल दी। भक्ति और प्रेम के इस दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

फरसा लेकर पहुंचे परशुराम, थर्राया दरबार
धनुष भंग की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि क्रोध की ज्वाला लिए भगवान परशुराम का आगमन हुआ। हाथ में फरसा और मुख पर तेज देखकर जनकपुरी का दरबार सहम उठा। स्वयंवर में आए कई राजा भयभीत होकर वहां से हटने लगे। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुआ तीखा संवाद लीला का प्रमुख आकर्षण बना। लक्ष्मण के निर्भीक प्रत्युत्तर और परशुराम के क्रोध ने वीर रस की ऐसी छटा बिखेरी कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। दोनों के संवादों के बीच श्रीराम की शालीनता और मर्यादा भी बार-बार उभरकर सामने आई।

राम का स्वरूप पहचानते ही बदला परशुराम का भाव
अंततः श्रीराम के सौम्य स्वरूप, शील और तेज को देखकर परशुराम को उनके वास्तविक स्वरूप का बोध हुआ। उनका क्रोध शांत हुआ और उन्होंने श्रीराम के प्रति अपना भाव समर्पण में बदल दिया। इसके बाद वे अपना धनुष श्रीराम को सौंपकर वहां से प्रस्थान कर गए। लीला के अगले प्रसंग में महाराज जनक ने अयोध्या के लिए दूत भेजकर महाराज दशरथ को विवाह का निमंत्रण भिजवाया। जनकपुरी में आरती के साथ पांचवें दिन की लीला का विश्राम हुआ।

BK Pathak
BK Pathak

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Beerkeshwar Pathak Journalist Beerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

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